Mohsina Kidwai Passes Away: कांग्रेस की वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री मोहसिना किदवई का बुधवार को 94 वर्ष की आयु में निधन हो गया। परिवारिक सूत्रों ने बताया कि उन्होंने बुधवार तड़के करीब चार बजे नोएडा के एक अस्पताल में अंतिम सांस ली। उन्हें आज शाम दिल्ली के निजामुद्दीन में स्थित कब्रस्तान में सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। किदवई पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के नेतृत्व वाली सरकार में स्वास्थ्य, परिवहन और शहरी विकास मंत्री रहीं। वह कई बार सांसद, कांग्रेस कार्य समिति की सदस्य और पार्टी संगठन में कई अन्य पदों पर रहीं।
मोहसिना किदवई का निधन (Photo: X)
मोहसिना का सियासी सफर
मोहसिना किदवई का जन्म 1932 में हुआ था और वे राष्ट्रीय राजनीति में कुछ प्रमुख मुस्लिम महिला नेताओं में से एक के रूप में उभरीं। उन्होंने कम उम्र में ही कांग्रेस पार्टी में प्रवेश किया और धीरे-धीरे पार्टी में उच्च पदों पर पहुंचीं। अपनी प्रशासनिक क्षमताओं और जमीनी स्तर पर जुड़ाव के लिए जानी जाने वाली मोहसिना ने विशेष रूप से उत्तर प्रदेश में एक मजबूत राजनीतिक आधार बनाया।
केंद्रीय सरकार में भूमिका
किदवई ने प्रधानमंत्री राजीव गांधी के कार्यकाल में केंद्रीय मंत्री के रूप में कार्य किया। उन्होंने शहरी विकास और स्वास्थ्य सहित कई महत्वपूर्ण विभागों का कार्यभार संभाला। उनके कार्यकाल में शहरी अवसंरचना और जन कल्याण प्रणालियों में सुधार लाने के उद्देश्य से कई नीतिगत पहल की गईं। पार्टी के भीतर उन्हें एक भरोसेमंद और अनुभवी प्रशासक के रूप में माना जाता था।
संसद और पार्टी में योगदान
अपने पूरे करियर के दौरान मोहसिना किदवई कई बार लोकसभा और राज्यसभा दोनों के लिए चुनी गईं। उन्होंने कांग्रेस संगठन के भीतर भी कई प्रभावशाली पदों पर कार्य किया, जिनमें कांग्रेस कार्य समिति और केंद्रीय चुनाव समिति की सदस्यता शामिल है। पार्टी की आंतरिक रणनीति और उम्मीदवारों के चयन में उनकी भूमिका को व्यापक रूप से सराहा गया।
- मोहसिना किदवई ने प्रधानमंत्री राजीव गांधी के कार्यकाल में केंद्रीय मंत्री के रूप में कार्य किया।
- अपने कार्यकाल के दौरान वे लोकसभा और राज्यसभा दोनों की सदस्य रहीं।
- उन्होंने कांग्रेस की कार्यकारी समिति और केंद्रीय चुनाव समिति में भी पद संभाले।
- वे भारतीय राजनीति की प्रमुख मुस्लिम महिला नेताओं में से एक थीं।
अंतिम संस्कार और विरासत
किदवई का निधन नोएडा के एक निजी अस्पताल में हुआ। उनका अंतिम संस्कार नई दिल्ली के निजामुद्दीन स्थित कब्रिस्तान में होगा। उन्होंने दशकों तक सार्वजनिक सेवा, संगठनात्मक नेतृत्व और शासन में योगदान की विरासत छोड़ी है। उनके निधन से कांग्रेस पार्टी, विशेषकर उसके वरिष्ठ नेतृत्व के लिए एक युग का अंत हो गया है।
