UPA is now I.N.D.I.A: विपक्षी मोर्चे के नए गठबंधन का नाम "इंडिया" है, जिसका मतलब या फुल फॉर्म इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इन्क्लूसिव एलायंस है। कांग्रेस के पूर्व चीफ राहुल गांधी ने यह नाम सुझाया था, जबकि इसका प्रस्ताव पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री व तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की सुप्रीमो ममता बनर्जी ने रखा था। हालांकि, इस नाम पर फाइनल मुहर इतनी आसानी से नहीं लगाई जा सकी, क्योंकि अपोजीशन के कुछ बड़े और अनुभवी नेताओं ने इस पर सवाल उठाया और इस पर शुरुआती तौर पर इन्कार तक किया था।
विपक्षी गठबंधन का नाम ‘‘इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इन्क्लूसिव एलायंस (इंडिया)’’ है।
सूत्रों की मानें तो इस नाम का सुझाव सबसे पहले राहुल की ओर से आया था, पर वह चाहते थे कि कांग्रेस महासचिव (संगठन) केसी वेणुगोपाल इसे पहले बनर्जी से मंजूर करा लें। दीदी एक बार में इस नाम पर रजामंद हो गई थीं। उन्होंने बस इस नाम में एन (N) को लेकर यह कहा था कि इसका अर्थ नेशनल (राष्ट्रीय) के बजाय न्यू (नया) है। वैसे, डी लेटर को लेकर भी अनौपचारिक तौर पर चर्चा हुई थी कि यह डेमोक्रेटिक हो या फिर डेवपलमेंटल रखा जाए।
प्लान के मुताबिक, ममता ने इस नाम का प्रस्ताव रखा, जिसके बाद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने अपनी टिप्पणी की। हालांकि, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सवाल उठाया कि आखिरकार किसी सियासी गठबंधन का नाम इंडिया कैसे हो सकता है। यही नहीं, आश्चर्यचकित होकर वामपंथी नेता सीताराम येचुरी, डी राजा और जी देवराजन भी तुरंत आश्वस्त नहीं हुए और बैठक के बीच में ही हंगामा करने लगे थे। येचुरी बोले थे कि वी (विक्ट्री) फॉर इंडिया या फिर वी (We) फॉर इंडिया नाम रखा जाना चाहिए, मगर कई नेताओं को यह कैंपेन स्लोगन जैसा मालूम पड़ा और ठंडे बस्ते में चला गया।
जम्मू और कश्मीर की पूर्व सीएम और पीडीपी की मुखिया महबूबा मुफ्ती का सजेशन था कि नाम "भारत जोड़ो एलायंस" होना चाहिए। ऐसा इसलिए क्योंकि राहुल की भारत जोड़ो यात्रा को बड़ी सफलता मिली थी। उद्धव ठाकरे के गुट वाली शिवसेना की ओर से कहा गया था कि नाम में हिंदी टैगलाइन भी होनी चाहिए।
सूत्रों ने यह भी बताया कि एक नेता का सुझाव था कि गठबंधन का नाम ‘इंडियाज मेन फ्रंट’ (आईएमएफ) रखा जाए और कुछ ने ‘इंडियन पीपुल्स फ्रंट’ व ‘इंडियन प्रोग्रेसिव फ्रंट’ रखने की पैरवी की थी। वैसे, ‘इंडिया’ के लिए जल्द ही एक टैगलाइन तय की जाएगी जो संभवत: हिंदी में होगी।
ध्यान देने वाली यह बात है कि विपक्ष की ओर से यह कदम (मोर्चे के नामकरण से जुड़ा) नौ राज्यों के विधानसभा चुनाव और साल 2024 के आम चुनाव (Lok Sabha Elections 2024) से पहले लिया गया है। यानी यूपीए अब एक तरह से इतिहास हो गया है और इंडिया वर्तमान है। अपोजीशन की छतरी तले साथ आए 26 दलों की ओर से इस कदम को सियासी गलियारों में अपनी चुनावी बिसात बिछाने के आगाज के तौर पर देखा गया।
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