Jayant Chaudhary Death Threat: केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी को शुक्रवार को एक अनजान नंबर से जान से मारने की धमकी भरा फोन आया। उन्होंने इस बारे में पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। उनके पर्सनल असिस्टेंट, विश्वेंद्र शाह को फोन और WhatsApp के जरिए धमकी दी गई।
केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी को मिली जान से मारने की धमकी
धमकी देने वाले की पहचान पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद के इस्माइल के तौर पर हुई है। आरोप है कि उसके पास मंत्री के आधिकारिक दौरे के प्लान की एक कॉपी थी। दिल्ली पुलिस ने शिकायत दर्ज कर ली है और पश्चिम बंगाल पुलिस भी इस पूरे मामले की जांच कर रही है।
जयंत चौधरी कौन हैं?
जयंत चौधरी एक जाने-माने राजनेता हैं, जो अभी केंद्र सरकार में केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) के तौर पर काम कर रहे हैं। वह राष्ट्रीय लोक दल (RLD) के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। RLD एक क्षेत्रीय राजनीतिक पार्टी है, जिसका पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मजबूत जनाधार है।
किसानों के बारे में जयंत चौधरी ने क्या कहा?
राष्ट्रीय लोक दल के प्रमुख जयंत चौधरी ने इस हफ्ते की शुरुआत में कहा कि किसान, किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) के जरिए बेहतर बाजारों तक पहुंच बनाकर अपने कारोबार का विस्तार कर सकते हैं, और आर्थिक रूप से मजबूत बनने के लिए उन्हें एक संगठित तरीके से काम करने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि सरकार ने किसानों को आसानी से कर्ज देने के लिए किसान क्रेडिट कार्ड की सीमा बढ़ा दी है, लेकिन इन योजनाओं का पूरा फायदा तभी मिलेगा जब किसान जागरूक होंगे और समूहों में मिलकर काम करेंगे।
उत्तर प्रदेश में एक जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, 'किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत बनने के लिए एक संगठित तरीके से काम करने की जरूरत है और वे किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) के जरिए बेहतर बाजारों तक पहुंच बनाकर अपने कारोबार का विस्तार कर सकते हैं।'
चौधरी ने कहा कि किसान स्वभाव से ही जोखिम उठाने वाले होते हैं, क्योंकि वे खेती में हर मौसम में जोखिम उठाते हैं। उन्होंने कहा, 'अगर किसानों की युवा पीढ़ी खेती के साथ-साथ कारोबार और प्रबंधन की समझ भी विकसित कर ले, तो गाँवों की हालत में काफी बदलाव आ सकता है।'
अपने दादा, पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह और अपने पिता, पूर्व केंद्रीय मंत्री चौधरी अजित सिंह द्वारा किसानों के लिए किए गए कामों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि NDA सरकार भी उन्हीं के विचारों के अनुरूप किसानों के लिए काम कर रही है। उन्होंने कहा कि आज किसान बेबस नहीं हैं, बल्कि वे देश की सांस्कृतिक विरासत का प्रतिनिधित्व करते हैं।
