UGC के नए जाति भेदभाव नियम को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती, सभी जातियों के खिलाफ भेदभाव का मुद्दा उठाया

याचिका बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के छात्र मृतुंजय तिवारी की ओर से दायर की गई है और उनकी ओर से सुप्रीम कोर्ट में नीरज सिंह पैरवी कर रहे हैं। याचिकाकर्ता का कहना है कि समानता और सामाजिक न्याय का उद्देश्य महत्वपूर्ण है, लेकिन उसे लागू करने के लिए ऐसे नियम नहीं बनाए जा सकते जो संविधान द्वारा संरक्षित अधिकारों को सीमित करें या विश्वविद्यालयों के अकादमिक वातावरण को भय और असुरक्षा से भर दें।

उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव को रोकने के उद्देश्य से विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा हाल ही में अधिसूचित किए गए प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशन) रेगुलेशन 2026 को अब सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। यूजीसी का कहना है कि इससे एससी, एसटी और ओबीसी छात्रों के खिलाफ होने वाले जातिगत भेदभाव को रोकने में मदद मिलेगी। इन नियमों का पालन न करने पर UGC मान्यता रद्द करने तक का प्रावधान है।

सुप्रीम कोर्ट

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इन नियमों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई है, जिसमें कहा गया है कि यूजीसी ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर ऐसे प्रावधान बनाए हैं जो संविधान के मूल ढांचे, विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के खिलाफ हैं। याचिका में सुप्रीम कोर्ट से इन नियमों को असंवैधानिक घोषित करने की मांग की गई है और इनके क्रियान्वयन पर रोक लगाने का आग्रह किया गया है।

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