Udaipur Files: उदयपुर फाइल्स को लेकर केंद्र सरकार ने बदलाव के सुझाव दिए है। मंत्रालय ने हाईकोर्ट के आदेश पर 5 सदस्यीय जांच पैनल का गठन किया था। उदयपुर फाइल्स फिल्म की रिलीज पर फैसला लेने के लिए सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने जिस कमेटी का गठन किया था। प्रभात, एडिशनल सेक्रेट्री, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, कमेटी के अध्यक्ष थे। इसके अलावा चार सदस्यों को शामिल किया गया था। जिनमें अनिल सुब्रह्मण्यम, संयुक्त सचिव, गृह मंत्रालय, अनिला शर्मा, सोना कुमारी, सतीश पांडे जो कि सीबीएफसी के एडवाइजरी पैनल मेंबर थे।इस कमेटी की सबसे पहली बैठक 16 जुलाई को ढाई बजे हुई थी। जिसमें फिल्म निर्माता और जमीयत उलेमा हिंद के प्रतिनिधि थे। इसके बाद 17 जुलाई को फिल्म की विशेष स्क्रीनिंग रखी गई थी। जिसमें विशेष रूप से विदेश मंत्रालय के प्रतिनिधियों को भी बुलाया गया था। ताकि फिल्म के रिलीज होने से भारत के दूसरे देशों के साथ सम्बन्ध पर पढ़ने वाले असर को समझा जा सके। सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई गुरुवार को होगी और इसी दिन फिल्म के रिलीज पर फैसला होना है।
फिल्म को लेकर मुस्लिम पक्ष की क्या आपत्तियां थी?
- फिल्म का अनसेंसर ट्रेलर जारी किया गया था, जो Cinematograph Act और CBFC के नियमों का उल्लंघन माना गया।
- CBFC द्वारा 55 कट्स सुझाए गए थे, लेकिन याचिकाकर्ताओं का कहना था कि कट्स के बावजूद फिल्म का मूल संदेश नफरत फैलाना ही है।
- फिल्म में कई संवाद और दृश्य ऐसे बताए गए जो मुस्लिम समुदाय को एकतरफा और हिंसक दिखाते हैं।
- यह भी आरोप है कि फिल्म कोर्ट में लंबित ज्ञानपावी जैसे मामलों को दिखाकर अदालत की अवमानना कर रही है।
जांच कमेटी के सामने फिल्म मेकर्स ने क्या पक्ष रखा
- फिल्म निर्माताओं ने स्वीकार किया कि बिना सेंसर ट्रेलर अपलोड करना गलती थी और उसे दो दिन में हटा दिया गया।
- उन्होंने कहा कि फिल्म क्राइम-सेंट्रिक है, कम्युनिटी-सेंट्रिक नहीं।
- मुस्लिम समुदाय को सकारात्मक रूप में भी दिखाया गया है — नमाज पढ़ते, अंतिम संस्कार में भाग लेते आदि।
- फिल्म based on true facts नहीं, बल्कि inspired by true events है।
- उनका दावा है कि फिल्म के सभी हिस्से CBFC की गाइडलाइन के अनुसार एडिट किए गए हैं।
- यदि कोर्ट इस फिल्म पर रोक लगाता है, तो यह रचनात्मक स्वतंत्रता पर बड़ा प्रभाव डालेगा।
जांच कमेटी की रिकमेंडेशन
1. फिल्म के डिस्क्लेमर में बदलाव किया जाए। वॉयस ओवर जोड़ा जाए।
2. अलग-अलग शख्सियतों को क्रेडिट देने वाले फ्रेम को हटाया जाए।
3. सऊदी अरब में इस्तेमाल होने वाली पगड़ी का जो AI वर्जन इस्तेमाल किया गया है, उसमें बदलाव करें।
4. नूपुर शर्मा के लिए इस्तेमाल किए प्रतीकात्मक नाम नूतन शर्मा को हटाया जाए, उसकी जगह नए नाम का इस्तेमाल हो।
5. किरदार नूतन शर्मा का डायलॉग हटाएं- मैने तो वही कहा है जो उनके धर्म ग्रंथों में लिखा है।
6. तीन और डायलॉग हटाए जाएं।
- हाफिज: बलूची कभी वफादार नहीं होता है
- मकबूल बलूची की..अरे क्या बलूची क्या...अफगानी क्या..हिन्दुस्तानी क्या..पाकिस्तानी
प्रसारण मंत्रालय की द्वारा गठित जांच कमेटी के सुझाव के बारे में सूचित किया गया। याचिकाकर्ता के वकील सीनियर एडवोकेट गौरव भाटिया ने कहा कि हमें 6 लगाने के सुझाव दिए गए हैं। जिस पर जस्टिस सूर्यकान्त ने साफ कहा कि ये बदलाव तो फिल्म मेकर को करने ही होंगे।
वहीं प्रोड्यूसर के वकील सैय्यद रिजवान अहमद ने कहा कि फिल्म पर जो एक कम्युनिटी को टारगेट करने का आरोप लग रहा था, सामाजिक सद्भाव बिगाड़ने की जो बात कही गई थी उसका जिक्र तक कहीं भी केंद्र सरकार की उच्च स्तरीय कमेटी ने अपनी जांच में नहीं किया है। सुप्रीम कोर्ट 24 जुलाई को फिल्म की रिलीज पर फैसला ले सकता है।
