Uniform Civil Code Row: समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लेकर उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने कहा है कि यूसीसी के कार्यान्वयन में और देरी हमारे मूल्यों के लिए हानिकारक होगी। इसकी अंतर्निहित उदात्तता की सराहना की जानी चाहिए और इसे समझा जाना चाहिए।
तस्वीर का इस्तेमाल सिर्फ प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है। (फाइल)
सुनिए, उन्होंने इस बारे में और क्या कहा:
इस बीच, उत्तर प्रदेश (यूपी) की राजधानी लखनऊ में समाजवादी पार्टी (सपा) नेता शिवपाल सिंह यादव ने कहा कि उन्हें (भाजपा) विकास से कोई सरोकार नहीं है। जब चुनाव करीब आते हैं तो वे ऐसे मुद्दे (समान नागरिक संहिता) लाते हैं। जब भी चुनाव आता है, भाजपा के लोग इसी तरह ध्रुवीकरण की बात करने लगते हैं और तुष्टिकरण की राजनीति करने लगते हैं। ये बात जनता भी समझ चुकी है...जनता यह जानती है कि जब चुनाव नजदीक आते हैं तो बीजेपी उन्हें भ्रमित करने के लिए कुछ न कुछ करती है।
यादव ने यूसीसी पर विधि आयोग की ओर से विभिन्न पक्षों से विचार मांगे जाने के समय पर सवाल उठाते हुए सत्तारूढ़ भाजपा पर इसके जरिए ''ध्रुवीकरण' का आरोप लगाया।
वैसे, इससे पहले सपा चीफ और यूपी के पूर्व सीएम अखिलेश यादव ने यूसीसी को लेकर केंद्र की आलोचना की थी। साथ ही कहा था कि इस मामले पर व्यापक रूप से चर्चा सिर्फ इसलिये की जा रही है क्योंकि भाजपा सरकार के पास नोटबंदी और 2000 रुपये के नोट को वापस लेने पर अपनी सफाई में कहने के लिए कुछ नहीं है।
दरअसल, यूसीसी को लागू करना भाजपा के चुनाव घोषणापत्र का हिस्सा रहा है। भारतीय जनता पार्टी ने 2022 के विधानसभा चुनाव में अपने घोषणापत्र में वादा किया था कि यदि वह सत्ता में आएगी तो समान नागरिक संहिता लागू करेगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले महीने भोपाल में भाजपा कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए इसकी पुरजोर वकालत की थी।
उन्होंने पूछा था कि देश व्यक्तिगत मामलों को नियंत्रित करने वाले दोहरे कानूनों के साथ कैसे काम कर सकता है। उन्होंने विपक्ष पर इस मुद्दे का उपयोग मुस्लिम समुदाय को "गुमराह करने और भड़काने" के लिए करने का आरोप भी लगाया था।
