आजादी के 78 सालों में भारतीय रेलवे का कायाकल्प: अब सस्ती, स्वच्छ और आधुनिक यात्रा का भरोसा

रेलवे में 2004-14 के बीच सिर्फ 9,587 बायो-टॉयलेट लगे थे, लेकिन 2014 से 2025 के बीच यह संख्या 3.33 लाख तक पहुंच गई, यानी 34 गुना वृद्धि। अब कोई भी कोच ऐसा नहीं जिसमें बायो-टॉयलेट न हो।

स्वतंत्रता के 78 वर्षों में भारतीय रेलवे ने खुद को केवल एक परिवहन साधन से एक स्मार्ट, सस्ती और सर्वसुविधायुक्त प्रणाली के रूप में स्थापित किया है। आज़ादी के शुरुआती सालों में जहां रेलवे सीमित संसाधनों और साधारण ढांचे पर निर्भर था, वहीं अब यह आधुनिक ट्रेनों, हाईटेक स्टेशनों, डिजिटल सेवाओं और पर्यावरण-हितैषी प्रयासों का प्रतीक बन चुका है।

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