Naxals Surrender In Bijapur: छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में बुधवार को 30 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर दिया, जिनमें से 20 पर कुल 79 लाख रुपये का इनाम था। पुलिस ने यह जानकारी दी। एक अधिकारी ने बताया कि इन नक्सलियों में नौ महिलाएं भी शामिल हैं। बीजापुर के पुलिस अधीक्षक जितेंद्र कुमार यादव ने बताया कि नक्सलियों ने वरिष्ठ पुलिस और सीआरपीएफ अधिकारियों के समक्ष आत्मसमर्पण किया।
बीजापुर में 30 नक्सलियों ने किया सरेंडर (File Photo: PTI)
सोनू हेमला और पत्नी सुकड़ी पर था 10 लाख का इनाम
आत्मसमर्पण करने वालों में सोनू हेमला उर्फ कोरोटी (38) भी शामिल है, जो एक संभागीय समिति का सदस्य और माओवादियों के केके उप-विभागीय ब्यूरो का प्रभारी था और 2003 से सक्रिय था। उस पर और उसकी पत्नी सुकड़ी गावड़े पर 8 लाख रुपये और 2 लाख रुपये का इनाम था। अन्य सदस्यों में दो प्लाटून पार्टी कमेटी सदस्य (पीपीसीएम) शामिल हैं, जिनकी पहचान कल्लू पुनेम (28) और कोसी कुंजम (28), पार्टी सदस्य मोती पुनेम (25) और पांडे पुनेम (25) और पीएलजीए (पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी) कैडर छोटू कुंजम (19) के रूप में हुई है, जिन पर 8-8 लाख रुपये का इनाम था।
आत्मसमर्पण करने वाले दो नक्सलियों पर 5-5 लाख रुपये का इनाम था, जबकि नौ अन्य पर 2-2 लाख रुपये का इनाम था। उन्होंने बताया कि आत्मसमर्पण करने वाले दो और नक्सलियों पर 50-50 हजार रुपये का इनाम था। इस ताजा घटना के साथ, जनवरी से अब तक बीजापुर जिले में आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों की संख्या बढ़कर 307 हो गई है।
यादव ने दावा किया कि माओवादियों ने खोखली माओवादी विचारधारा, आदिवासियों पर अत्याचार और आंतरिक कलह से मोहभंग होने के बाद आत्मसमर्पण किया। पुलिस ने बताया कि आत्मसमर्पण करने वाले कार्यकर्ता राज्य सरकार की 'नियाद नेल्लनार' (आपका अच्छा गांव) योजना और राज्य सरकार की नई आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति से भी प्रभावित थे। इसके अलावा, बस्तर पुलिस ने हथियार डालने वाले नक्सलियों के लिए "पूना मार्गम (सामाजिक पुनर्मिलन हेतु पुनर्वास)" नामक पुनर्वास पहल शुरू की है।
सभी आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को 50-50 हजार रुपये की सहायता प्रदान की गई। राज्य पुलिस की विभिन्न इकाइयों, सीआरपीएफ की 199वीं, 170वीं और 85वीं बटालियनों और कोबरा (सीआरपीएफ की एक विशेष इकाई) की 202वीं बटालियन ने आत्मसमर्पण में विशेष भूमिका निभाई है। पुलिस अधीक्षक ने कहा, कई माओवादी 'नियाद नेल्लानार' और राज्य सरकार की नई आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर हिंसा छोड़कर आत्मसमर्पण कर रहे हैं।
नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शांति और विकास को बढ़ावा देने के लिए ये पहल शुरू की गई हैं। उन्होंने आगे कहा कि आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों को पुनर्वास, रोजगार और शिक्षा जैसी विभिन्न सुविधाएँ प्रदान की जा रही हैं। इसके अलावा, माओवादी हिंसा से प्रभावित लोगों को राहत और पुनर्वास प्रदान किया जा रहा है।
