ऑपरेशन सिंदूर पर लोकसभा में चर्चा में भाग लेते हुए विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सीजफायर में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भूमिका के सवाल का जवाब देते हुए कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान डोनाल्ड ट्रंप और पीएम मोदी के बीच कोई सीधी बात नहीं हुई। विदेश मंत्री ने कहा कि 22 अप्रैल से 17 जून के बीच PM मोदी और ट्रंप के बीच कोई सीधा संवाद नहीं हुआ।
विदेश मंत्री एस जयशकंर ऑपरेशन सिंदूर पर लोकसभा में बोलते हुए (फोटो- संसद टीवी)
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न व्यापार का जिक्र न ट्रंप से बातचीत
विदेश मंत्री ने लोकसभा ने कहा- "9 और 10 मई को हमारी सेना ने एक बड़े हमले को विफल किया, इसके लिए हमें अपने सेना को बधाई देनी चाहिए। 10 मई के बाद हमें अन्य देशों से संदेश मिला कि पाकिस्तान लड़ाई रोकने के लिए तैयार है, और हमने साफ किया कि DGMO को संपर्क करना होगा। मैं स्पष्ट करना चाहता हूं कि जहां तक अमेरिकी राष्ट्रपति की टिप्पणी का सवाल है, किसी भी समय बातचीत का व्यापार से कोई संबंध नहीं था। असल में, 22 अप्रैल से 17 जून तक प्रधानमंत्री मोदी और ट्रंप के बीच कोई बातचीत नहीं हुई।
विपक्ष के आरोपों पर क्या बोले एस जयशंकर
पहलगाम हमले के बाद भारत को विदेश से समर्थन नहीं मिलने के विपक्ष के दावों को खारिज करते हुए विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सोमवार को लोकसभा में कहा कि संयुक्त राष्ट्र के 193 सदस्यों में से पाकिस्तान और तीन अन्य देशों को छोड़कर सभी ने ऑपरेशन सिंदूर का समर्थन किया था।
ऑपरेशन सिंदूर विषय पर लोकसभा में चर्चा में भाग लेते हुए जयशंकर ने पाकिस्तान को चीन के समर्थन पर विपक्ष के आक्षेपों को नकारते हुए कहा कि दोनों देशों की साझेदारी 60 साल से कांग्रेस के समय से चल रही है। विदेश मंत्री ने सदन में कहा, ‘‘पहलगाम हमले के बाद पाकिस्तान को स्पष्ट संदेश देना जरूरी था। हमारी सीमाएं लांघी गईं तो यह संदेश देना जरूरी था कि परिणाम अच्छे नहीं होंगे।’’ उन्होंने हमले के बाद सिंधु जल संधि को स्थगित करने और अटारी सीमा बंद करने जैसे कूटनीतिक निर्णयों का जिक्र करते हुए कहा कि इन शुरुआती कदमों के बाद भारत का जवाब रुका नहीं। उन्होंने कहा कि भारत ने वैश्विक विमर्श और कूटनीतिक माहौल बनाकर यह स्पष्ट संदेश दिया कि उसकी ‘‘आतंकवाद को कतई बर्दाश्त नहीं करने’’ की नीति है और वह अपने लोगों की रक्षा करेगा।
