UP News: उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में पुलिस कस्टडी में अतीक-अशरफ हत्याकांड में उत्तर प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में स्टेटस रिपोर्ट पेश की है। इस रिपोर्ट में यूपी सरकार ने कहा है कि इस हत्याकांड में उत्तर प्रदेश पुलिस की कोई गलती नहीं थी। साथ ही यूपी सरकार ने यह भी कहा है कि उसने इस घटना और अन्य मामलों की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। इनमें गैंगस्टर विकास दुबे की हत्या और 2017 के बाद से विभिन्न पुलिस मुठभेड़ शामिल हैं।
अतीक-अशरफ हत्याकांड
बता दें, पुलिस कस्टडी में माफिया अतीक और उसके भाई अशरफ को गोलियों से भून दिया गया था। इस घटना का वीडियो भी वायरल हुआ था, जिसके बाद जमकर बवाल मचा था और विपक्षी पार्टियों ने इसको लेकर पुलिस की कार्यशैली पर सवाल भी खड़े किए थे। इस मामले की जांच के लिए सरकार को निर्देश देने के लिए सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका भी दाखिल की गई थी।
जांच में पुलिस की कोई गलती नहीं
सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की गई याचिका में अतीक-अशरफ हत्याकांड और विकास दुबे एनकाउंटर समेत सात घटनाओं का जिक्र किया गया था। इन मामलों में पेश की गई स्टेटस रिपोर्ट में सरकार ने कहा है कि अभी तक की जांच में पुलिस की कोई गलती नहीं पाई गई है। सबूत इकट्ठा करने के लिए पुलिस की जांच अभी तक जारी है। उत्तर प्रदेश सरकार ने यह भी कहा कि विकास दुबे मामले में सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति बीएस चौहान की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय न्यायिक जांच आयोग का गठन किया गया था। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि पुलिस मुठभेड़ में मारे गए अपराधियों के संबंध में दर्ज मामलों की जांच और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग द्वारा चल रही जांच के संबंध में सभी जोन या कमिश्नरेट से जानकारी प्राप्त करने के बाद पुलिस मुख्यालय स्तर पर नियमित समीक्षा की गई है।
15 अप्रैल को हुई थी अतीक की हत्या
बता दें, प्रयागराज में बीते 15 अप्रैल को माफिया अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। जिस समय यह हत्या हुई, दोनों पुलिस कस्टडी में थे और मीडिया के सवालों का जवाब दे रहे थे। इस दौरान पत्रकार बनकर तीन लोगों ने दोनों पर ताबड़तोड़ गोलियां दागीं और माफिया बंधुओं को मौत के घाट उतार दिया। इस घटना की फुटेज भी वायरल हुई थी। पुलिस ने तीनों को तुरंत गिरफ्तार कर लिया। इनकी पहचान अरुण मौर्या, सनी और लवलेश तिवारी के रूप में की गई थी।
