दि कश्मीर फाइल्स फिल्म पर दिए आईएफएफआई जूरी चीफ के बयान के बाद विवाद और गर्मा गया है। मनोरंजन के मंच से सोशल मीडिया और सियासी गलियारों तक इसकी आंच पहुंच चुकी है। मंगलवार (29 नवंबर, 2022) को असम के मुख्यमंत्री हेमंत बिस्व सरमा ने सिलचर में कहा कि जूरी सदस्य भगवान नहीं है। यह फिल्म हमें अच्छी लगी और हमने इसे प्रमोट किया। हमने देखा है कि कश्मीर में क्या हुआ...आखिरकार उनके पास (जूरी सदस्यों) कौन सा अधिकार क्षेत्र था, जो उन्होंने फिल्म पर इस तरह की टीका-टिप्पणी की?
इस बीच, महाराष्ट्र के उप-मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस बोले, फिल्म में सच दिखाया गया, जिसे ढेर सारी रिसर्च के बाद दर्शाया गया। देश के सेंसर बोर्ड ने फिल्म को मंजूर किया। किसी को भी फिल्म के बारे में इस प्रकार की टिप्पणियां करने का अधिकार नहीं हैं, जबकि टाइम्स नाउ नवभारत की सीनियर पत्रकार नविका कुमार को दिए खास इंटरव्यू में एक्टर अनुपम खेर ने बताया कि फिल्म पर ऐसा बयान देकर टूलकिट गैंग एक्सपोज हुआ।
दरअसल, इजराइली फिल्म निर्देशक और भारत अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (इफ्फी) के अंतरराष्ट्रीय जूरी अध्यक्ष नदव लापिद ‘द कश्मीर फाइल्स’ पर अपने बयान को लेकर विवादों में घिरे हैं। सोमवार को उन्होंने इसे ‘‘दुष्प्रचार करने वाली’’ और ‘‘भद्दी’’ फिल्म बताया था। यही वजह रही कि इजराइल के राजूदत तक ने लापिद के बयान की आलोचना की और कहा कि उन्होंने भारत के निमंत्रण का दुरुपयोग किया।
