संविधान दिखावे के लिए लहराने की चीज नहीं, इसे पढ़ना, समझना और सम्मानित करना जरूरी- उपराष्ट्रपति

उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने कहा कि युवा पीढ़ी को 21 महीनों के आपातकाल को याद रखने और जागरूक रहने की अपील करते हुए, जो स्वतंत्रता के बाद भारत के इतिहास का सबसे काला दौर था।

उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने आज गहरी चिंता व्यक्त की कि बाबा साहेब आंबेडकर को भारत रत्न से वंचित करने और मंडल आयोग की सिफारिशों को लगभग 10 वर्षों तक लागू न करने की मानसिकता आज भी जीवित है, और संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति जो विदेशी धरती पर लगातार 'भारत विरोधी बयान' दे रहे हैं, आरक्षण समाप्त करने की बात कर रहे हैं। संविधान के दिखावे की और लहराने की आलोचना करते हुए धनखड़ ने कहा कि संविधान दिखावे के लिए लहराने की चीज़ नहीं , संविधान का सम्मान किया जाना चाहिए। संविधान को पढ़ा जाना चाहिए। संविधान को समझा जाना चाहिए। केवल संविधान को एक किताब के रूप में प्रस्तुत करना, प्रदर्शित करना—कम से कम किसी भी सभ्य, जानकार व्यक्ति, जो संविधान के प्रति समर्पित भावना रखता है, और संविधान की आत्मा का सम्मान करता है—उसे स्वीकार नहीं करेगा।

jagdeep dhankhar

हमारे लोकतांत्रिक संवैधानिक मूल्यों पर हमले को ठुकराना चाहिए - उपराष्ट्रपति

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