भोपाल के बहु चर्चित ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत के मामले में अब देश की सबसे बड़ी अदालत ने स्वतः संज्ञान लिया है। सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली बेंच सोमवार को इस मामले की सुनवाई कर सकती है। इस बेंच में चीफ जस्टिस सूर्यकांत,जस्टिस जॉय माल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली शामिल हैं।
सुप्रीम कोर्ट
सूत्रों के मुताबिक, अदालत ने प्रथम दृष्टया मामले में कई गंभीर पहलुओं को नोट किया है। इनमें ट्विशा की ससुराल में हुई “अप्राकृतिक मौत”, पुलिस जांच और प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियां, निचली अदालत पर संस्थागत पक्षपात के आरोप और पुलिस-प्रशासन की कार्रवाई पर उठ रहे सवाल शामिल हैं। बताया जा रहा है कि इन सभी बिंदुओं को गंभीर मानते हुए सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान (Suo Motu Cognisance) लिया है। अब सोमवार को होने वाली सुनवाई में अदालत जांच की दिशा, पुलिस की भूमिका और अब तक हुई कार्रवाई पर सवाल उठा सकती है।
इस मामले को लेकर पहले से ही लगातार विवाद और विरोध देखने को मिल रहा है। ट्विशा के परिवार की ओर से जांच में निष्पक्षता को लेकर कई आरोप लगाए गए हैं। वहीं, सोशल मीडिया पर भी इस केस को लेकर व्यापक बहस छिड़ी हुई है।
सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री ने मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के समक्ष रखा था विस्तृत नोट
इस बीच, टाइम्स नाउ नवभारत को पता चला है कि ट्विशा शर्मा मामले में सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री ने इस मामले में स्वतः संज्ञान (Suo Motu Cognisance) की अनुमति मांगते हुए एक विस्तृत नोट भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के समक्ष रखा था।
नोट में क्या-क्या?
नोट में कहा गया है कि मामले की जांच को प्रभावित किए जाने और संभावित समझौते को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। यह दस्तावेज मीडिया रिपोर्ट्स, हाईकोर्ट की टिप्पणियों और ट्विशा शर्मा की मौत से जुड़े अन्य चिंताजनक तथ्यों के आधार पर तैयार किया गया है।
रजिस्ट्री द्वारा CJI के समक्ष रखे गए नोट में उल्लेख है कि 33 वर्षीय कॉरपोरेट प्रोफेशनल और पूर्व अभिनेत्री ट्विशा शर्मा की 12 मई 2026 को भोपाल स्थित ससुराल में “अप्राकृतिक मौत” हुई थी। नोट में मानसिक प्रताड़ना, कथित दहेज मांग और ससुराल पक्ष के न्यायपालिका से जुड़े होने के कारण संभावित “Institutional Cover-Up” यानी संस्थागत लीपापोती के आरोपों का भी जिक्र किया गया है।
नोट के अनुसार,मीडिया के एक वर्ग में यह नैरेटिव उभर रहा है कि मामले की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच न्यायिक प्रभाव के कारण प्रभावित हो सकती है, क्योंकि मृतका की सास एक सेवानिवृत्त जिला न्यायाधीश रही हैं। इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए मुख्य न्यायाधीश से दो प्रमुख बिंदुओं पर आदेश मांगे गए थे:
क्या इस मामले में जांच की निष्पक्षता, संस्थागत पारदर्शिता और संभावित प्रभाव के व्यापक सवालों पर सुप्रीम कोर्ट स्वतः संज्ञान ले। यदि अनुमति दी जाती है, तो मामले को “Suo Motu Writ Petition (Criminal)” के रूप में दर्ज किया जाए, जिसका शीर्षक प्रस्तावित किया गया है:
“In Re: Alleged Institutional Bias and Procedural Discrepancies in the unnatural death of a young girl at her matrimonial home” और इसे चीफ जस्टिस की बेंच के समक्ष लिस्ट किया जाए, ताकि ऐसे संवेदनशील मामलों में निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए मजबूत प्रोटोकॉल तय किए जा सकें।
