Rahul Gandhi Petition: राहुल गांधी और विपक्षी नेताओं की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई से पहले रजिस्ट्री ने 14 आपत्तियां दर्ज की हैं। 12 अक्टूबर 2026 को दर्ज इन आपत्तियों में याचिका में निजी पक्षों को प्रतिवादी बनाने के कारण से लेकर वकालतनामे, पहचान पत्र, कोर्ट फीस और दस्तावेजों की स्पष्टता तक से जुड़े मुद्दे शामिल हैं। इन खामियों के कारण 13 अक्टूबर को सुनवाई के लिए जारी सुप्रीम कोर्ट की सप्लीमेंट्री कॉज लिस्ट में राहुल गांधी की याचिका शामिल नहीं है। ऐसे में आज उनकी याचिका पर सुनवाई नहीं होगी। सोमवार देर रात 11:25 बजे सप्लीमेंट्री लिस्ट जारी हुई थी।
सुप्रीम कोर्ट
9 याचिकाकर्ताओं के वकालतनामे नहीं मिले
रजिस्ट्री के मुताबिक, याचिकाकर्ता नंबर 3 से 11 तक के वकालतनामे नहीं मिले हैं। इन याचिकाकर्ताओं में सौगत राय, अखिलेश यादव, तेजस्वी प्रसाद यादव, संजय राउत, एमए बेबी, डी राजा, महुआ माझी, सुप्रिया सुले और ईटी मोहम्मद बशीर शामिल हैं। इसके अलावा, याचिकाकर्ता नंबर 2 मल्लिकार्जुन खड़गे के पहचान पत्र की स्पष्ट कॉपी जमा करने को कहा गया है।निजी पक्षों को प्रतिवादी बनाने पर स्पष्टीकरण
रजिस्ट्री ने याचिका में निजी पक्षों को प्रतिवादी बनाने का कारण स्पष्ट करने को कहा है। साथ ही, पेज नंबर 9 पर प्रतिवादियों के विवरण को गलत बताया गया है। लिस्टिंग प्रोफॉर्मा में प्रतिवादी का सही नाम दर्ज करने को लेकर भी आपत्ति है। याचिका के प्रार्थना वाले हिस्से में प्रतिवादी नंबर को सही करने के लिए कहा गया है। हालांकि, उपलब्ध आपत्तियों से यह स्पष्ट नहीं होता कि इन टिप्पणियों का संबंध विशेष रूप से मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार या निर्वाचन आयुक्त सुखबीर सिंह संधू के नामों से है।24 जून 2025 के फैसले की कॉपी मांगी
रजिस्ट्री ने याचिका की प्रार्थना संख्या (A) में जिस 24 जून 2025 के फैसले का उल्लेख किया गया है, उसके अनुलग्नक की कॉपी जमा करने को कहा है। अनुलग्नक P2 की तारीख का रिकॉर्ड से मेल नहीं खाने और अनुलग्नक P5 के केस नंबर में विसंगति भी दर्ज की गई है। अनुलग्नक P6 के लिए पेनड्राइव उपलब्ध कराने को कहा गया है।
पहले दायर याचिका और समानता संबंधी पैराग्राफ पर आपत्ति
रजिस्ट्री ने सुप्रीम कोर्ट के नियमों के तहत यह जानकारी देने से जुड़ी आपत्ति दर्ज की है कि क्या याचिकाकर्ताओं ने चुनौती दिए गए आदेश या फैसले के खिलाफ पहले भी कोई याचिका दायर की है और यदि हां, तो उसका परिणाम क्या रहा। रजिस्ट्री ने समानता संबंधी पैराग्राफ नहीं मिलने की बात भी दर्ज की है।
220 रुपये अतिरिक्त कोर्ट फीस और दस्तावेजों में गड़बड़ी
रजिस्ट्री ने कोर्ट फीस में 220 रुपये की कमी बताई है। कुछ दस्तावेजों के धुंधले या छोटे फॉन्ट में होने, पेजों के गायब होने और पेजों के क्रम में विसंगतियों को भी दूर करने के लिए कहा गया है। पेज नंबर 57 और 64 की रंगीन प्रतियां जमा करने का निर्देश दिया गया है।
आपत्तियां दूर होने के बाद आगे बढ़ेगी प्रक्रिया
रजिस्ट्री की आपत्तियों का निस्तारण याचिका की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के लिए जरूरी है। हालांकि, इन आपत्तियों का मतलब यह नहीं है कि याचिका खारिज कर दी गई है। कमियां दूर होने और आगे की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही याचिका को सुनवाई के लिए लिस्ट किया जा सकेगा।
