Supreme Court Notice Lok Sabha Speaker: महाराष्ट्र की राजनीति और संसद के भीतर छिड़े सियासी घमासान को लेकर देश की सर्वोच्च अदालत से बड़ी खबर सामने आई है। सुप्रीम कोर्ट ने शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला, लोकसभा सचिवालय के सचिव और 6 बागी सांसदों को औपचारिक नोटिस जारी कर दिया है।
सुप्रीम कोर्ट का बड़ा कदम, शिवसेना (UBT) के 6 सांसदों के विलय मामले में लोकसभा अध्यक्ष, सचिव और बागी सांसदों को नोटिस जारी
सुप्रीम कोर्ट ने इस संवेदनशील और महत्वपूर्ण संवैधानिक मामले पर सभी पक्षों से जवाब मांगा है और सुनवाई के लिए दो सप्ताह बाद की तारीख तय की है।
शिवसेना (UBT) का आरोप
शिवसेना (UBT) के संसदीय दल के नेता अरविंद सावंत द्वारा अनुच्छेद 32 के तहत दायर इस याचिका में लोकसभा सचिवालय के 18 जुलाई के उस सर्कुलर को चुनौती दी गई है, जिसके जरिए 6 सांसदों के शिंदे नीत शिवसेना में विलय को हरी झंडी दी गई थी।
याचिका में उठाए गए प्रमुख बिंदु:
एकतरफा विलय का विरोध: वरिष्ठ अधिवक्ता देवदत्त कामत ने चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के सामने तर्क दिया कि मूल राजनीतिक दल के विलय के बिना केवल 6 सांसदों का यह एकतरफा निर्णय असंवैधानिक और अवैध है।
पार्टी कामकाज पर असर: याचिकाकर्ताओं ने कहा कि लोकसभा अध्यक्ष के इस फैसले से संसद के भीतर शिवसेना (UBT) की संसदीय कार्यप्रणाली पूरी तरह से ठप हो गई है और उनकी संख्या घटकर महज 3 सांसदों की रह गई है।
बता दें कि मानसून सत्र से पहले लोकसभा अध्यक्ष ने 18 जुलाई को शिवसेना (उबाठा) के छह सांसदों के शिंदे नीत शिवसेना में विलय को अनुमति दी थी। आधिकारिक सूत्रों ने बताया था कि इन छह सांसदों के विलय के बाद लोकसभा में शिवसेना के सदस्यों की संख्या बढ़कर 13 हो गई है।
शिवसेना (उबाठा) के टिकट पर कुल नौ सांसद निर्वाचित हुए थे, जिनमें से छह शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल हो गए हैं। शिवसेना (उबाठा) ने लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष दलील दी थी कि उसके बागी सांसदों को अयोग्य घोषित किया जाना चाहिए क्योंकि यह दल-बदल विरोधी कानून के दायरे में आता है।
बता दें कि मानसून सत्र से पहले लोकसभा अध्यक्ष ने 18 जुलाई को शिवसेना (उबाठा) के छह सांसदों के शिंदे नीत शिवसेना में विलय को अनुमति दी थी। आधिकारिक सूत्रों ने बताया था कि इन छह सांसदों के विलय के बाद लोकसभा में शिवसेना के सदस्यों की संख्या बढ़कर 13 हो गई है। शिवसेना (उबाठा) के टिकट पर कुल नौ सांसद निर्वाचित हुए थे, जिनमें से छह शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल हो गए हैं। शिवसेना (उबाठा) ने लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष दलील दी थी कि उसके बागी सांसदों को अयोग्य घोषित किया जाना चाहिए क्योंकि यह दल-बदल विरोधी कानून के दायरे में आता है।
