बच्चों के खिलाफ होने वाले यौन अपराधों को लेकर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने एक बेहद महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया है कि अगर कोई भी नाबालिग बच्चा या बच्ची किसी व्यक्ति को अपने साथ हुए यौन शोषण या ऐसी किसी आशंका की जानकारी देता है, तो पोक्सो (POCSO) कानून के तहत उस व्यक्ति की यह अनिवार्य कानूनी जिम्मेदारी बन जाती है कि वह तुरंत पुलिस या संबंधित अधिकारियों को इसकी सूचना दे। अदालत ने जोर देकर कहा कि ऐसी स्थिति में बच्चे द्वारा कही गई बात को बेहद गंभीर और पूरी तरह भरोसेमंद माना जाएगा। कोई भी व्यक्ति इस जिम्मेदारी से मुंह नहीं मोड़ सकता।
पॉक्सो के मामलों पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया ऐतिहासिक फैसला (फाइल फोटो- PTI)
'आंखों देखी घटना या चोट के निशान' होना जरूरी नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने उन बहानों को सिरे से खारिज कर दिया जो अक्सर लोग कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए बनाते हैं। कोर्ट ने कहा, बच्चे से जानकारी पाने वाला कोई भी व्यक्ति (चाहे वह शिक्षक हो, रिश्तेदार हो या पड़ोसी) यह कहकर पल्ला नहीं झाड़ सकता कि उसने घटना को अपनी आंखों से नहीं देखा था। शिकायत दर्ज न कराने के लिए यह बहाना भी नहीं चलेगा कि बच्चे के शरीर पर कोई बाहरी चोट या जख्म के निशान नहीं दिखाई दे रहे थे।
संवेदनशीलता से पूछें सवाल
अदालत ने बच्चों की मानसिक स्थिति को समझते हुए दिशानिर्देश भी दिए। कोर्ट ने कहा, "अगर बच्चा छोटा होने या डर के कारण पूरी बात साफ-साफ नहीं बता पा रहा है, तो उससे बहुत प्यार और संवेदनशीलता के साथ जरूरी सवाल पूछे जा सकते हैं। लेकिन याद रहे, ये सवाल बच्चे की शिकायत को झूठा या मनगढ़ंत साबित करने के इरादे से नहीं, बल्कि केवल सच्चाई को समझने और उसकी मदद करने के लिए होने चाहिए।"
अरुणाचल प्रदेश के स्कूल मामले में आया फैसला
यह ऐतिहासिक फैसला अरुणाचल प्रदेश के एक स्कूल से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान आया। यहां 8 साल की एक मासूम बच्ची ने स्कूल के ही एक सीनियर छात्र पर यौन शोषण का आरोप लगाया था। पीड़ित बच्ची ने इस दर्दनाक घटना की जानकारी अपनी क्लास टीचर, बड़ी बहन, सहेली और स्कूल की हेड गर्ल को दी थी। इससे पहले गुवाहाटी हाई कोर्ट ने स्कूल की शिक्षिकाओं और हेडमिस्ट्रेस को इस मामले में राहत दे दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए हाई कोर्ट के उस आदेश को पूरी तरह रद्द कर दिया है।
कार्रवाई का दायरा भी किया साफ
हालांकि, देश की सर्वोच्च अदालत ने इस मामले में एक व्यावहारिक पहलू को भी स्पष्ट किया है। कोर्ट ने साफ किया कि कानूनी कार्रवाई केवल उन्हीं लोगों के खिलाफ की जाएगी, जिन्हें पीड़ित बच्चे या बच्ची ने सीधे तौर पर घटना की जानकारी दी थी और इसके बावजूद उन्होंने इसकी सूचना आगे पुलिस प्रशासन को नहीं दी।
सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला बच्चों की सुरक्षा को मजबूत करने और समाज में 'पोक्सो कानून' के प्रति जवाबदेही तय करने की दिशा में एक बहुत बड़ा कदम माना जा रहा है।
