अरावली की परिभाषा पर सुप्रीम कोर्ट ने लिया संज्ञान, 29 दिसंबर को CJI करेंगे सुनवाई

अरावली रेंज को लेकर केंद्र सरकार की नई परिभाषा ने बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। पर्यावरणविदों और विपक्षी दलों का कहना है कि 100 मीटर ऊंचाई को आधार बनाकर तय की गई परिभाषा से हरियाणा, राजस्थान और गुजरात के बड़े हिस्सों में खनन का रास्ता खुल सकता है, जिससे गंभीर पर्यावरणीय संकट पैदा होगा। इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए 29 दिसंबर को सुनवाई तय की है।

SC On Aravalli Hills: अरावली पर्वतमाला को लेकर उठे विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान (Suo Motu Cognisance) लिया है। पर्यावरणविदों और विपक्षी दलों की ओर से केंद्र सरकार की नई अधिसूचित परिभाषा पर गंभीर आपत्तियां जताई जा रही हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की अवकाशकालीन पीठ 29 दिसंबर को इस पर सुनवाई करेगी। जिसकी अध्यक्षता CJI सूर्यकांत करेंगे।

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अरावली की 100 मीटर वाली परिभाषा पर उठा सवाल (सांकेतिक तस्वीर)

नई परिभाषा पर क्यों उठे सवाल

केंद्र सरकार ने हाल ही में अरावली पर्वतमाला की नई परिभाषा अधिसूचित की है, जिसमें 100 मीटर की ऊंचाई को आधार बनाया गया है। पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि इस परिभाषा से हरियाणा, राजस्थान और गुजरात के बड़े हिस्सों में अरावली क्षेत्र को खनन के लिए खोलने का रास्ता साफ हो सकता है। उनका आरोप है कि यह फैसला वैज्ञानिक अध्ययन और सार्वजनिक परामर्श के बिना लिया गया है।

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