Subhash C Kashyap Dies: मशहूर संविधान विशेषज्ञ और लोकसभा के पूर्व महासचिव सुभाष सी. कश्यप का बृहस्पतिवार को निधन हो गया। वह 97 वर्ष के थे। लोकसभा सचिवालय के सूत्रों ने बताया कि कश्यप का निधन सुबह करीब 10 बजे दिल्ली स्थित उनके आवास पर हृदय गति रुक जाने के कारण हुआ। वह पिछले कुछ समय से अस्वस्थ भी थे।
मशहूर संविधान विशेषज्ञ और लोकसभा के पूर्व महासचिव सुभाष सी. कश्यप का निधन। Piyush Goyal X handle
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उनके निधन पर दुख जताया। राष्ट्रपति ने ’एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ’’लोक सभा के पूर्व महासचिव एवं सुप्रसिद्ध संविधान विशेषज्ञ डॉ. सुभाष सी. काश्यप जी के निधन का समाचार बहुत दुःखद है। उन्होंने हमारे संविधान के अध्ययन को तथा हमारी संसदीय प्रणाली के विकास को अपनी विद्वत्ता और अंतर्दृष्टि से समृद्ध किया है। मैं उनके परिजनों और प्रशंसकों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करती हूं।’’ काश्यप पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता वाली उच्च स्तरीय समिति का हिस्सा थे, जिसका गठन ’एक साथ चुनाव’ कराने के लिए कानूनी ढांचा तैयार करने के वास्ते किया गया था।
'उनका संवैधानिक विमर्श में योगदान हमारे समाज के लिए समृद्ध रहा'
वहीं, प्रधानमंत्री मोदी ने दुख प्रकट करते हुए सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर लिखा, "लोकसभा के पूर्व महासचिव डॉ. सुभाष सी. कश्यप के निधन से गहरा दुःख हुआ है। वे भारत के अग्रणी संवैधानिक विद्वानों में से एक थे, जिनका संसदीय और संवैधानिक विमर्श में योगदान हमारे समाज के लिए समृद्ध रहा। लोकतांत्रिक संस्थाओं को सुदृढ़ करने के प्रति उनका लेखन और समर्पण सराहनीय था। उनके परिवार और मित्रों के प्रति हमारी गहरी संवेदनाएं। ओम शांति।"
संविधान की समझ को जन-जन तक पहुंचाया: ओम बिरला
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कश्यप के निधन पर दुख जताया और कहा कि वह भारतीय संविधान और संसदीय व्यवस्था के जीवंत विश्वकोश थे। बिरला ने ’एक्स’ पर पोस्ट किया,"प्रख्यात संविधान विशेषज्ञ, पद्म भूषण से सम्मानित डॉ. सुभाष सी. कश्यप जी का निधन अत्यंत दुःखद है। डॉ. कश्यप भारतीय संविधान और संसदीय व्यवस्था के जीवंत विश्वकोश थे। लोकसभा के महासचिव के रूप में उनकी दीर्घ और विशिष्ट सेवाएं, संवैधानिक विषयों पर उनका गहन अध्ययन तथा उनकी सौ से अधिक पुस्तकों ने देश की कई पीढ़ियों को मार्गदर्शन प्रदान किया।"उन्होंने कहा कि संसद, संविधान और लोकतांत्रिक संस्थाओं की समझ को जन-जन तक पहुंचाने में उनका योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा। लोकसभा अध्यक्ष ने कहा,"स्वतंत्रता आंदोलन की प्रेरणाओं से निर्मित उनका जीवन राष्ट्रसेवा, ज्ञान और नैतिक प्रतिबद्धता का उत्कृष्ट उदाहरण था। चाहे संसदीय प्रक्रियाओं का विकास हो, पंचायती राज संस्थाओं को सशक्त बनाने का कार्य हो या संवैधानिक सुधारों पर विचार-विमर्श, डॉ. कश्यप ने हर भूमिका में अपनी विद्वता और दूरदृष्टि की अमिट छाप छोड़ी। अपनी इस विद्वता के चलते उन्हें कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मानों से भी सम्मानित किया गया।"
1953 में लोकसभा सचिवालय के साथ जुड़े
कश्यप 1984 से 1990 तक सातवीं, आठवीं और नौवीं लोकसभा के महासचिव रहे। वह एक प्रख्यात राजनीतिक वैज्ञानिक, भारतीय संविधान, संवैधानिक कानून, संसदीय मामलों के विशेषज्ञ थे। उनका जन्म 10 मई 1929 को हुआ था। पत्रकारिता से अपने पेशेवर जीवन की शुरुआत करने वाले कश्यप कुछ समय के लिए वकील और शिक्षक भी रहे। वह 1953 में लोकसभा सचिवालय के साथ जुड़े और 37 वर्षों तक सेवा दी।
