नई दिल्ली: दुनिया भर में कृष्ण भक्ति का प्रचार–प्रसार के लिए प्रसिद्ध इस्कॉन बेंगलुरु को आज बड़ी जीत हासिल हुई है। सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक हाइकोर्ट के आदेश को पलटते हुए इस्कॉन बेंगलुरु को इस्कॉन मुंबई से अलग स्वतंत्र संस्था माना है। इस फैसले के चलते हरे कृष्ण हिल टेंपल इस्कॉन, बेंगलुरु के पास ही रहेगा।
सुप्रीम कोर्ट ने इस्कॉन बेंगलुरु को इस्कॉन मुंबई से अलग स्वतंत्र संस्था माना
सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस अभय एस ओक की अध्यक्षता वाली बेंच ने 25 साल से चले आ रहे विवाद पर ब्रेक लगा दिया है। 1978 में प्रभु श्रीपाद के सिद्धांतों को मानते हुए बेंगलुरु में इस्कॉन की एक नई शाखा की शुरुआत हुई थी। लेकिन 1997 में बेंगलुरु में मंदिर के लोकार्पण के बाद मुंबई में रजिस्टर्ड इस्कॉन ने इस पर अपना दावा कर ठोक दिया था।
इस्कॉन बेंगलुरु और इस्कॉन मुंबई में क्या है विवाद?
इस्कॉन के संस्थापक प्रभु श्रीपाद ने अपनी मृत्यु से पहले 11 ऋत्विक की व्यवस्था तय कर दी थी। इसका अर्थ ये था कि उनके देहावसान के बाद इस्कॉन में कोई नया गुरु नहीं होगा बल्कि उनके प्रतिनिधि के रूप में ये 11 ऋत्विक ही दीक्षा देंगे। लेकिन उस सिद्धांत को छुपाते हुए उन 11 प्रतिनिधियों ने खुद को ही गुरु घोषित कर दिया और इस्कॉन कई हिस्सों में विभाजित किया। नतीजा ये हुआ कि देश और दुनिया भर में इस्कॉन के कई स्वघोषित गुरुओं का न सिर्फ पतन हुआ बल्कि कृष्ण भक्ति का आंदोलन भी कमजोर पड़ने लगा। ऐसे में प्रभु श्री पाद को ही अंतिम गुरु मानते हुए बेंगलुरु में इस्कॉन की एक अलग संस्था स्वरूप में आई जिसने सैद्धानिक तौर पर खुद को इस्कॉन मुंबई से न सिर्फ अलग रखा बल्कि देश भर में हरे कृष्ण मूवमेंट और अक्षय पत्र की शुरुआत भी की।
प्रभु श्रीपाद के सिद्धांतों की बड़ी जीत–इस्कॉन बेंगलुरु
इस्कॉन बेंगलुरु के चेयरमैन मधु पंडित दास ने सुप्रीम कोर्ट में मीडिया से बात करते हुए कहा कि इस फैसले के बाद से 25 साल से चले आ रहे कानूनी विवाद पर विराम लग गया है। बेंगलुरु के हरे कृष्ण हिल टेंपल समेत देश भर में 25 मंदिरों पर इस्कॉन बेंगलुरु अपने हिसाब से चला सकेगा। इस्कॉन बेंगलुरु ही अक्षय पात्र फाउंडेशन का भी संचालन करती है जो देश भर में रोजाना 23 लाख स्कूली बच्चों को मिड डे मील उपलब्ध करवाती है। इसके अलावा टाइम्स नाउ नवभारत से बात करते हुए इस्कॉन बेंगलुरु के वाइस चेयरमैन और अक्षय पात्र के ट्रस्टी भरत दास ने कहा सनातन धर्म के प्रचार प्रसार का जो लक्ष्य प्रभु पाद ने तय किया था वो अब हम तेजी से पूरा कर सकेंगे। ये महज एक प्रॉपर्टी विवाद नहीं था बल्कि सिद्धांतों को को लेकर धर्मयुद्ध था, जिसमें हमने जीत हासिल की।
