Ladakh Violence: जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे अंगमो ने राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) के तहत पति की हिरासत को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। कोर्ट सोमवार को गीतांजलि अंगमो द्वारा दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई करेगा।
जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक (फाइल फोटो साभार: PTI)
जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस एन वी अंजारिया की बेंच करेगी सुनवाई। सोनम वांगचुक की पत्नी की तरफ से दाखिल याचिका में आरोप लगाया गया है कि वांगचुक को गैरकानूनी तरीके से हिरासत में रखा गया है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि पत्नी गीतांजलि को एक हफ्ते से ज्यादा समय से अपने पति के बारे में कोई जानकारी नहीं है।
अंगमो ने कोर्ट में दाखिल बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका में इसे तत्काल सूचीबद्ध करने और लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन को ‘‘माननीय न्यायालय के समक्ष सोनम वांगचुक को तुरंत पेश करने’’ का निर्देश देने का अनुरोध किया है। याचिका में बंदी तक तत्काल संपर्क प्रदान करने तथा निवारक निरोध आदेश को रद्द करने का भी अनुरोध किया गया है।
याचिका में केंद्रीय गृह मंत्रालय, लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन, लेह के उपायुक्त और जोधपुर जेल अधीक्षक को पक्षकार बनाया गया है। साथ ही उन्हें यह निर्देश देने का भी अनुरोध किया गया है कि वे ‘‘याचिकाकर्ता को उसके पति से टेलीफोन और व्यक्तिगत रूप से तत्काल संपर्क करने की अनुमति दें।’’ याचिका में आरोप लगाया गया कि वांगचुक की हिरासत ‘‘अवैध, मनमानी और असंवैधानिक’’ है, जो संविधान के अनुच्छेद 14, 19, 21 और 22 के तहत गारंटीकृत मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है।
इसमें कहा गया है, ‘‘वांगचुक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रशंसित नवप्रवर्तक, पर्यावरणविद् और समाज सुधारक रहे हैं। उन्होंने लद्दाख की पारिस्थितिक और लोकतांत्रिक चिंताओं को उजागर करने के लिए हमेशा गांधीवादी और शांतिपूर्ण तरीकों का समर्थन किया है।’’ याचिका में कहा गया वांगचुक को 26 सितंबर को लेह के उपायुक्त ने रासुका की धारा 3(2) के तहत हिरासत में लिया था। उन्हें तब हिरासत में लिया गया जब वह छठी अनुसूची के तहत संवैधानिक सुरक्षा उपायों की लद्दाख की मांग को लेकर लंबे समय से चल रहे अनशन से उबर रहे थे।
