Omar Abdullah : जम्मू एवं कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने मंगलवार को कहा कि पहलगाम आतंकवादी हमले में हुई सुरक्षा चूक के लिए किसी न किसी को तो जिम्मेदार ठहराना होगा। बीते 22 अप्रैल को पाकिस्तान से आए आतंकवादियों ने पहलगाम में छुट्टियां मना रहे 26 लोगों की गोली मारकर हत्या कर दी। आतंकियों ने धर्म पूछकर लोगों को गोली मारी। इस जघन्य घटना को अंजाम देने वाले आतंकवादी अभी भी पकड़ से बाहर हैं। इस हमले के बाद सुरक्षा में चूक पर सवाल उठे। सरकार ने भी माना कि इंटेलिजेंस में चूक हुई।
बीते 22 अप्रैल को पहलगाम में हुआ आतंकवादी हमला। तस्वीर-PTI
सुरक्षा में चूक की जिम्मेदारी तो तय हो-उमर
इस आतकंवादी घटना की जवाबदेही तय करने की मांग करते हुए उमर ने मीडिया से बातचीत में कहा, 'इस नाकामी के लिए कौन जिम्मेदार है? यदि यह इंटेलिजेंस की नाकामी है तो इसके लिए कौन जिम्मेदार है? 26 लोगों का जीवन समाप्त हो गया और हमारी तरफ से कोई आवाज न उठे, यह संभव नहीं है। हमें जब यह पता है कि सुरक्षा एवं इंटेलिजेंस में चूक हुई तो किसी को जिम्मेदार तो ठहराया ही जाना चाहिए।'
'बदलाव के दौर से गुजर रहा जम्मू-कश्मीर'
बीते 10 जुलाई को राज्य के लेफ्टिनेंट गवर्नर मनोज सिन्हा ने कहा कि जम्मू-कश्मीर बदलाव से गुजर रहा है, और यह कइयों का मनना है कि ऐसा बदलाव बीते 55 सालों में नहीं हुआ। अब यहां आतंकवाद जारी नहीं रह पाएगा। उन्होंने कहा कि 22 अप्रैल के हमले के बाद कश्मीर के लोग जिस तरह से पाकिस्तान के खिलाफ उठकर खड़े हुए, ऐसा इतिहास में कभी देखने को नहीं मिला। यह बताता है कि आतंकवाद अब यहां बीते दिनों की बात हो जाएगी।
गेट फांदकर कब्रिस्तान में दाखिल हुए उमर
विगत 13 जुलाई, 1931 को डोगरा सेना की गोलीबारी में मारे गए 22 लोगों को श्रद्धांजलि देने के लिए उमर अब्दुल्ला सोमवार को नक्शबंद साहिब कब्रिस्तान का गेट फांदकर अंदर दाखिल हुए। उन्होंने आरोप लगाया कि वहां जाने से रोकने के लिये उनके साथ ‘धक्का-मुक्की’की गई, लेकिन वह आज रुकने वाले नहीं थे। यह नाटकीय दृश्य अब्दुल्ला और नेशनल कॉन्फ्रेंस सहित विपक्षी दलों के कई नेताओं को शहीद दिवस के मौके पर कब्रिस्तान जाने से रोकने के लिए 13 जुलाई को घर पर नजरबंद किये जाने के एक दिन बाद देखने को मिला।
शहीद स्मारक तक एक ऑटो रिक्शा में पहुंचे
नेशनल कॉन्फ्रेंस अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला खानयार चौक से शहीद स्मारक तक एक ऑटो रिक्शा में पहुंचे, जबकि शिक्षा मंत्री सकीना इट्टू स्कूटी पर पीछे बैठकर स्मारक तक पहुंचीं। सुरक्षा बलों ने श्रीनगर के व्यस्त क्षेत्र में खानयार और नौहट्टा की ओर से शहीद कब्रिस्तान जाने वाली सड़कों को सील कर दिया था। जैसे ही उमर अब्दुल्ला का काफिला पुराने शहर के खानयार इलाके में पहुंचा, वह अपनी गाड़ी से उतर गए और कब्रिस्तान तक पहुंचने के लिए एक किलोमीटर से अधिक पैदल चले, लेकिन प्राधिकारियों ने कब्रिस्तान का द्वार बंद कर दिया था।
