लिव इन पार्टनर को मिलते हैं ये कानूनी अधिकार,श्रद्धा की ये बात नहीं मान रहा था आफताब

  • Authored by: प्रशांत श्रीवास्तव
  • Updated Nov 14, 2022, 07:18 PM IST

Shraddha Murder Case: भारत में लिव-इन में रहना गैर कानूनी नहीं है। इस बात की व्याख्या सुप्रीम कोर्ट आज से 16 साल पहले कर चुका हैं। यही नहीं सुप्रीम कोर्ट ने लिव-इन रिलेशन से पैदा होने वाले बच्चों को संपत्ति का भी अधिकार दिया है। इसके अलावा कई हाई कोर्ट भी लिव-इन को जायज ठहरा चुके हैं।

KEY HIGHLIGHTS
  • श्रद्धा अपने मां-बाप के खिलाफ जाकर आफताब के साथ लिव-इन में रह रही थी।
  • वह आफताब के साथ शादी करना चाहती थी।
  • आफताब को श्रद्धा की शादी करने वाली मांग मंजूर नहीं थी।

Shraddha Murder Case: मुंबई की रहने वाली श्रद्धा वालकर की हत्या के खुलासे ने पूरे देश को हिला दिया है। जिस आफताब (Aftab) से वह प्यार करती थी, उसी ने उसके 35 टुकड़े कर डाले । हैवानियत की हद ऐसी की फ्रिज में रखकर हर रोज वह श्रद्धा के एक टुकड़े को जंगल में फेंकता था। दिल्ली पुलिस के अनुसार आफताब और श्रद्धा लिव-इन (Live In Relationship) में रहा करते थे। लेकिन श्रद्धा इस रिश्ते को नाम देना चाहती थी और यही से आफताब ने अपना रंग दिखाना शुरू कर दिया। और श्रद्धा की आवाज को उसने हमेशा के लिए खामोश कर दिया। भारत में लिव-इन में रहना गैर कानूनी नहीं है। इस बात की व्याख्या सुप्रीम कोर्ट आज से 16 साल पहले कर चुका हैं। यही नहीं सुप्रीम कोर्ट ने लिव-इन रिलेशन से पैदा होने वाले बच्चों को संपत्ति का भी अधिकार दिया है। सुप्रीम कोर्ट के फैसलों से स्पष्ट है कि भले ही भारतीय समाज में अभी भी लिव-इन रिलेशन को पूरी तरह से मान्यता नहीं मिली है लेकिन कानून के नजर में वह अवैध नहीं है।

लिव-इन रिलेशन में क्या मिलते हैं अधिकार

लिव-इन रिलेशनशिप, यानी शादी किए बगैर जब दो बालिग लोग आपसी सहमति से साथ में रहते हैं। और उनका आपस में रिश्ता पति पत्नी की तरह होता है। लेकिन पति पत्नी की तरह रहने के बावजूद दोनों के बीच विवाह जैसा सामाजिक संबंध नहीं होता है। इसके बावजूद सुप्रीम कोर्ट ने साल 2006 में अपने एक फैसले में कहा था कि वयस्क होने के बाद व्यक्ति किसी के साथ रहने या शादी करने के लिए आजाद है। लाइव लॉ के अनुसार सुप्रीम कोर्ट ने अपने अलग-अलग फैसले में लिव-इन को अपराध नहीं माना है।

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