Mahakal Lok : शिवराज की सोच से साकार हुई भव्य 'महाकाल लोक' की परिकल्पना

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  • Updated Oct 11, 2022, 06:46 PM IST

Mahakal Lok Corridor : महाकाल लोक की अवधारणा वर्ष 2017 में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के मन में आई थी। इस पर विभिन्न सामाजिक एवं धार्मिक संस्थाओं, संतों और विषय-विशेषज्ञों के साथ विचार-विमर्श कर योजना तैयार की गई थी जिस पर गंभीरता से अमल करते हुए योजना का प्रथम चरण पूर्ण हुआ है।

Mahakal Lok Corridor : धर्म देश की प्राणवायु है और आस्था इस महान देश की आत्मा। भारतीय संस्कृति अगर आज जीवंत बनी है तो इसके पीछे हमारी धार्मिक और सांस्कृतिक परम्पराएं हैं।प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सत्ता में आने के बाद धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी भारत को दुनिया के मानचित्र पर नई पहचान मिल रही है। उनके कुशल नेतृत्व में हमारे देश के कई वर्षों की समृद्ध विरासत को न केवल संजोने का प्रयास किया जा रहा है बल्कि धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों को पुनर्स्थापित करने का भी बेहतर प्रयास किया जा रहा है। दिव्य 'महाकाल लोक' देश की सनातन संस्कृति की पौराणिकता, ऐतिहासिकता और गौरवशाली परम्परा का अद्भुत संगम है। इसका निर्माण जिस भव्यता और सुंदरता के साथ नए रुप में किया गया है, वह आमजन को आज चमत्कृत कर देता है। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रथम चरण के इसके निर्माण कार्य को समय से पहले पूर्ण कर अपनी आध्यात्मिक नगरी और विकासवादी सोच की अवधारणा को मजबूत किया है।

Shivraj  singh chauhan

महाकाल मंदिर पर अगाध श्रद्धा रखते हैं सीएम शिवराज सिंह चौहान।

महाकाल ने लिया नया आकार

शिवराज सिंह चौहान देश के उन चुनिंदा राजनेताओं में से एक हैं जो हर कदम पर जनता से साथ निभाने का वादा करते हैं, तो निभाते भी हैं और हर कदम पर जनता के साथ खड़े दिखाई देते हैं। क्षिप्रा के तट पर बसी प्राचीनतम नगरी उज्जैन का 'महाकाल लोक' आज उनकी कुशल नेतृत्व क्षमता और दूरदर्शी सोच को प्रस्तुत करता है जो भगवान शिव के भक्तों के स्वागत के लिए अब तैयार है। महाकवि कालिदास के महाकाव्य मेघदूत में महाकाल वन की परिकल्पना को जिस सुंदर ढंग से प्रस्तुत किया गया था, सैकड़ों वर्षों के बाद उसके वैभव को मुख्यमंत्री शिवराज ने साकार रूप प्रदान किया है। ये दुनिया के हर कोने से उज्जैन आने वाले भक्तों के लिए के लिए नया अनुभव देने का अनूठा प्रयास भी है जिसके परिणाम आने वाले वर्षों में सामने आएंगे। 'महाकाल लोक' की अवधारणा वर्ष 2017 में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के मन में आई थी। इस पर विभिन्न सामाजिक एवं धार्मिक संस्थाओं, संतों और विषय-विशेषज्ञों के साथ विचार-विमर्श कर योजना तैयार की गई थी जिस पर गंभीरता से अमल करते हुए योजना का प्रथम चरण पूर्ण हुआ है।

संसाधनों से पूरी तरह से सुसज्जित है

'महाकाल लोक' आज आधुनिक व्यवस्थाओं और संसाधनों से पूरी तरह से सुसज्जित है। कम समय में शिवराज सरकार ने यहाँ पर इतनी व्यवस्थाएं की हैं जो उज्जैन आने वाले लोगों का मन मोह लेती है। मंदिरों के साथ ही पूजा सामग्री और हार-फूल की दुकानों को भी विशिष्ट तरीके से लाल पत्थर से बनाया गया है,जिन पर सुंदर नक्काशी की गई है। भगवान शिव की जिन कथाओं का महाभारत, वेदों तथा स्कंद पुराण के अवंती खंड में उल्लेख है, उनका जीवंत अनुभव अब धर्मनगरी उज्जैन में लिया जा सकता है । 'महाकाल लोक' के जरिए शिव के सभी स्वरूप एक स्थान पर लाना मध्यप्रदेश की शिवराज सरकार के सामने मुश्किल कार्य था लेकिन सरकार के अथक प्रयासों से यह काम समय में साकार हो गया। आज 'महाकाल लोक' के जरिये भारतीय सांस्कृतिक विरासत दुनिया के फलक पर अपनी चमक बिखेर रही है।

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