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Punjab Bandh: चंडीगढ़-मनाली सहित कई राजमार्ग बंद, सिख बंदियों की रिहाई के लिए कौमी इंसाफ मोर्चा ने बढ़ाया दबाव

बंद के दौरान चंडीगढ़-मोहाली सीमा पर सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। मोहाली के फेज 7 स्थित एक ट्रैफिक चौराहे की तस्वीरों में बंद समर्थक सिख गाड़ियों को रोकते और यातायात बाधित करते दिखे। कौमी इंसाफ मोर्चा और नेशनल जस्टिस फ्रंट ने जंगपुरा गांव में जीरकपुर-पटियाला हाईवे को जाम कर दिया।

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कौमी इंसाफ मोर्चा ने किया है बंद का आह्वान।

Punjab Bandh: पंजाब बंद के दौरान राज्य भर में जगह-जगह राष्ट्रीय एवं राज्य के राजमार्ग बंद किए जा रहे हैं। कौमी इंसाफ मोर्चा ने चंडीगढ़-मनाली नेशनल हाईवे को भी बंद किया है। इस राजमार्ग पर वाहनों की आवाजाही पूरी तरीके से रोक दी गई है। हालांकि, इमरजेंसी सेवाओं से जुड़े वाहनों को जाने दिया जा रहा है। दोपहर 2 बजे तक प्रदर्शनकारियों ने इसी तरीके से हाई-वे बंद रखने का ऐलान किया है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जो सिख सजा पूरी कर चुके हैं उन्हें सरकार रिहा नहीं कर रही है, इसलिए हमने आज बंद का ऐलान किया है।

चंडीगढ़-मोहाली बॉर्डर पर सुरक्षा बढ़ाई गई

बंद के दौरान चंडीगढ़-मोहाली सीमा पर सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। मोहाली के फेज 7 स्थित एक ट्रैफिक चौराहे की तस्वीरों में बंद समर्थक सिख गाड़ियों को रोकते और यातायात बाधित करते दिखे। कौमी इंसाफ मोर्चा और नेशनल जस्टिस फ्रंट ने जंगपुरा गांव में जीरकपुर-पटियाला हाईवे को जाम कर दिया। बीकेयू (क्रांतिकारी) के कार्यकर्ताओं ने बंद के समर्थन में रामपुरा मोड़ (रामपुर मऊ चौक) पर बठिंडा-बरनाला हाईवे को बाधित किया। कौमी इंसाफ मोर्चा ने मोहाली में गुरुद्वारा सोहाना साहिब के सामने की सड़क को भी बंद कर दिया, जबकि पुलिस कई स्थानों पर स्थिति पर नजर बनाए हुए है।

कौमी इंसाफ मोर्चा का क्या कहना है?

आयोजकों ने कहा कि अपनी सजा पूरी कर चुके सिख बंदियों जिनमें से कुछ पिछले 30 वर्षों से जेल में बंद हैं, उन्हें रिहा नहीं किया जा रहा है, जिससे मजबूर होकर उन्हें बंद का आह्वान करना पड़ा। उन्होंने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान पर इस मुद्दे पर 'नाटक' करने का आरोप भी लगाया। आयोजकों ने बंद के लिए जनता से सहयोग की अपील की और स्पष्ट किया कि आपातकालीन सेवाओं से जुड़े वाहनों को नहीं रोका जाएगा।

बंद का समर्थन कौन-कौन कर रहा है?

इस आह्वान को लुधियाना में मिश्रित प्रतिक्रिया मिली है। शिरोमणि अकाली दल (SAD) और वारिस पंजाब दे उन प्रमुख समूहों में शामिल है जिन्होंने इस बंद का समर्थन किया है। वारिस पंजाब दे के मनप्रीत सिंह अयाली ने इसे एक जायज मांग बताते हुए सवाल उठाया कि इन कैदियों को अभी भी जेल में क्यों रखा गया है। तो वहीं, शिअद के वरिष्ठ नेता महेशइंदर सिंह ग्रेवाल ने सिख बंदियों पर फैसला टालने के लिए केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने विशेष रूप से बलवंत सिंह रजोआणा के मामले का हवाला देते हुए कहा कि उनके केस पर फैसला चाहे जो भी हो बहुत पहले हो जाना चाहिए था।

सड़कों से लगभग 800 बसें दूर रहेंगी

स्मॉल स्केल डिस्ट्रिक्ट बस ऑपरेटर वेलफेयर एसोसिएशन ने भी बंद का समर्थन किया। इसके पंजाब महासचिव जसविंदर सिंह ग्रेवाल ने कहा कि बंद के समय के दौरान लुधियाना की सड़कों से लगभग 800 बसें दूर रहेंगी। जिला कांग्रेस अध्यक्ष संजय तलवार ने कहा कि पार्टी का रुख राज्य नेतृत्व के फैसले पर निर्भर करेगा। जम्हूरी किसान सभा पंजाब के अध्यक्ष रघुबीर सिंह बेनीपाल ने कहा कि उनका संगठन इस आह्वान का न तो समर्थन कर रहा है और न ही विरोध। हालांकि, उन्होंने सवाल उठाया कि राज्य सरकार का ध्यान केवल एक व्यक्ति की रिहाई पर ही क्यों केंद्रित दिखता है, जबकि कई अन्य कैदी विभिन्न जेलों में बंद हैं।

Alok Rao
आलोक कुमार रावauthor

19 वर्षों से मीडिया जगत में सक्रिय आलोक राव ने प्रिंट, न्यूज एजेंसी, टीवी और डिजिटल चारों ही माध्यमों में काम किया है। इस लंबे अनुभव ने उन्हें समाचारों की समझ, प्रेजेंटेशन, डिटेलिंग और न्यूजरूम डायनेमिक्स में असाधारण दक्षता प्रदान की है। राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों में विशेष रुचि रखने के साथ-साथ जियो-पॉलिटिक्स एवं डिफेंस की स्टोरीज में इनकी खासी दिलचस्पी है। आलोक ने अलग-अलग माध्यमों में काम करते हुए समाचारों की समझ, प्रस्तुति और विश्लेषण में मजबूत दक्षता विकसित की है और अब तक 25,000 से अधिक आर्टिकल तैयार कर चुके हैं। तथ्यों की गहन जांच, मजबूत न्यूज सेंस और तेज निर्णय क्षमता उनकी पत्रकारिता की प्रमुख खासियतें हैं।

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