सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: 2021 का पर्यावरण मंजूरी वाला ऑफिस मेमोरेंडम रद्द, लेकिन केंद्र के अधिकार बरकरार

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि 2006 की ईआईए (EIA) अधिसूचना के तहत पूर्व पर्यावरण मंजूरी अनिवार्य है और इसमें बदलाव केवल वैधानिक अधिसूचना से ही संभव है।

सुप्रीम कोर्ट ने पोस्ट-फैक्टो (काम शुरू होने के बाद) पर्यावरण मंजूरी (Environmental Clearance) को लेकर बुधवार को अहम फैसला सुनाया। कोर्ट ने केंद्र सरकार के वर्ष 2021 के ऑफिस मेमोरेंडम को रद्द कर दिया, जिसके जरिए बिना पूर्व पर्यावरण मंजूरी के शुरू हुई परियोजनाओं को बाद में मंजूरी देने की व्यवस्था बनाई गई थी। हालांकि, चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल पंचोली की पीठ ने साफ किया कि केंद्र सरकार के पास पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 की धारा-3 के तहत वैधानिक अधिसूचना जारी कर ऐसी व्यवस्था बनाने का अधिकार है। लेकिन यह काम केवल प्रशासनिक आदेश या ऑफिस मेमोरेंडम के जरिए नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि 2006 की ईआईए (EIA) अधिसूचना के तहत पूर्व पर्यावरण मंजूरी अनिवार्य है और इसमें बदलाव केवल वैधानिक अधिसूचना से ही संभव है।

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पर्यावरण मंजूरी पर सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला

ये परियोजनाए शामिल

इन परियोजनाओं में ओडिशा में एक एम्स, कर्नाटक के विजयनगर में एक ग्रीनफील्ड हवाई अड्डा और प्रदूषण नियंत्रण के लिए महत्वपूर्ण कई सार्वजनिक अपशिष्ट उपचार संयंत्र शामिल हैं। हालांकि, सर्वोच्च न्यायालय ने माना कि केंद्र के पास पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 की धारा 3 के तहत जारी वैधानिक अधिसूचनाओं के माध्यम से पूर्वव्यापी पर्यावरण अनुमोदन (ईसी) प्रदान करने का अधिकार है, और यह केवल एक प्रशासनिक कार्यालय ज्ञापन (OM) जारी करके नहीं किया जा सकता है। 2021 का ओएम (कार्यालय ज्ञापन) एक प्रशासनिक आदेश है, और यह बिना पूर्व अनुमोदन के शुरू की गई परियोजनाओं को स्थायी रूप से पर्यावरण अनुमोदन प्रदान करने की व्यवस्था करता है।

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