देश में कैंसर के मामलों की अनिवार्य और एक समान रिपोर्टिंग की मांग वाली याचिका पर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच को याचिकाकर्ता की ओर से पेश अधिवक्ता गौरव बंसल ने बताया कि कुछ उत्तर भारतीय राज्य कैंसर को नोटिफाएबल बीमारी घोषित करने को तैयार नहीं हैं। नोटिफाएबल (अधिसूचित) बीमारी का मतलब ऐसी बीमारी है, जिसके मामले सामने आने पर स्वास्थ्य विभाग को इसकी जानकारी देना अनिवार्य होता है। याचिकाकर्ता का कहना है कि देशभर से कैंसर का एक समान डेटा मिलने से नेशनल कैंसर रजिस्ट्री को इलाज की योजना बनाने और ज्यादा स्क्रीनिंग वाले इलाकों की पहचान करने में मदद मिलेगी।
सुप्रीम कोर्ट
सभी राज्यों के कैंसर का डेटा क्यों जरूरी?
एडवोकेट गौरव बंसल ने कहा कि देशभर में कैंसर के मामलों का एक समान डेटा जरूरी है, क्योंकि इसी आधार पर नेशनल कैंसर रजिस्ट्री यह तय कर सकती है कि बीमारी के इलाज की योजना कैसे बनाई जाए और किन इलाकों में ज्यादा स्क्रीनिंग की जरूरत है।36 में से 17 राज्यों में कैंसर नोटिफाएबल बीमारी
सुप्रीम कोर्ट ने अगस्त में कहा था कि देश के 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में से 17 पहले ही कैंसर को नोटिफाएबल बीमारी घोषित कर चुके हैं। बाकी 19 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से कोर्ट ने इस पर विचार करने को कहा था। कोर्ट ने इन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को संसद की स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण संबंधी स्थायी समिति की सिफारिशों पर विचार कर अनुपालन हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया था।
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि कुछ उत्तर भारतीय राज्यों ने अभी तक कैंसर को नोटिफाएबल बीमारी घोषित नहीं किया है। इनमें उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्य शामिल हैं। वहीं, हरियाणा, पंजाब और हिमाचल प्रदेश में कैंसर को नोटिफाएबल बीमारी घोषित किया जा चुका है।
संसद की समिति ने भी की थी सिफारिश
संसदीय स्थायी समिति ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में कैंसर को नोटिफाएबल बीमारी घोषित करने की सिफारिश की थी। समिति के मुताबिक, कैंसर की व्यवस्थित रिपोर्टिंग से रियल-टाइम डेटा तैयार होगा, निगरानी व्यवस्था मजबूत होगी और क्षेत्र के हिसाब से स्क्रीनिंग, इलाज और स्वास्थ्य संसाधनों की योजना बनाने में मदद मिलेगी।केंद्र ने कहा- रिपोर्टिंग पोर्टल काम कर रहा है
सुनवाई के दौरान एडिशनल सॉलिसिटर जनरल अनिल कौशिक ने कोर्ट को बताया कि कैंसर के मामलों की रिपोर्टिंग के लिए मौजूदा पोर्टल काम कर रहा है। उन्होंने कहा, “पोर्टल अभी भी मौजूद है। यह काम कर रहा है और रिपोर्टिंग हो रही है।” जब CJI सूर्यकांत ने पूछा कि क्या पोर्टल प्रभावी है, तो ASG ने कहा, “यह प्रभावी है।”
पंजाब ने जुलाई 2026 में की घोषणा
याचिकाकर्ता के वकील ने पंजाब का उदाहरण देते हुए बताया कि राज्य सरकार ने जुलाई 2026 में कैंसर को नोटिफाएबल बीमारी घोषित किया है। इसके तहत संबंधित स्वास्थ्य संस्थानों को कैंसर के रिकॉर्ड रखने और बीमारी के निदान व इलाज के मामलों की रिपोर्ट करने की जरूरत होगी।
जम्मू-कश्मीर को पक्षकार बनाने का निर्देश
सुनवाई के दौरान वकील ने बताया कि जम्मू-कश्मीर को गलती से मामले में पक्षकार नहीं बनाया गया था। वकील ने कहा, “कुछ चूक के कारण जम्मू-कश्मीर को पक्षकार नहीं बनाया गया।” इस पर CJI सूर्यकांत ने कहा, “इस बीच, भारत संघ उचित कदम उठा सकता है। जम्मू-कश्मीर को पक्षकार बनाया जाए।”
