13 से 15 मार्च तक चलने वाली इस महत्वपूर्ण बैठक में देशभर से करीब 1400 प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं।बैठक का उद्घाटन सरसंघचालक Mohan Bhagwat और सरकार्यवाह Dattatreya Hosabale ने किया। शुरुआत में विभिन्न क्षेत्रों के दिवंगत व्यक्तित्वों को श्रद्धांजलि दी गई, जिसके बाद सरकार्यवाह ने संघ का वार्षिक प्रतिवेदन प्रस्तुत किया।
समालखा में संघ का महामंथन
सह सरकार्यवाह C. R. Mukunda ने मीडिया को बताया कि संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर देशभर में चल रहे कार्यक्रमों को समाज से उत्साहजनक समर्थन मिल रहा है। उन्होंने कहा कि इस वर्ष संगठन विस्तार के साथ-साथ समाज की ‘सज्जन शक्ति’ को सामाजिक सद्भाव और समरसता के लिए संगठित करना प्रमुख लक्ष्य है।
उन्होंने बताया कि शताब्दी वर्ष कार्यक्रमों की शुरुआत 2 अक्टूबर 2025 को Nagpur में हुई थी, जिसमें पूर्व राष्ट्रपति Ram Nath Kovind भी शामिल हुए थे।
10 करोड़ घरों तक पहुंचा गृह संपर्क अभियान
संघ के अनुसार शताब्दी वर्ष के तहत चल रहे गृह संपर्क अभियान के माध्यम से अब तक देश के 37 प्रांतों में करीब 10 करोड़ घरों और लगभग 3.9 लाख गांवों तक पहुंच बनाई जा चुकी है। इस अभियान में स्वयंसेवकों ने विभिन्न वर्गों और समुदायों के परिवारों से संवाद किया। मुकुंद ने बताया कि Kerala में ही 55 हजार से अधिक मुस्लिम और 54 हजार से अधिक ईसाई परिवारों से संपर्क किया गया, जहां स्वयंसेवकों का स्वागत किया गया।
37 हजार से ज्यादा हिंदू सम्मेलन
वार्षिक प्रतिवेदन के मुताबिक देशभर में अब तक 37,048 हिंदू सम्मेलनों का आयोजन किया जा चुका है, जिनमें करीब साढ़े तीन करोड़ लोगों ने हिस्सा लिया। इन कार्यक्रमों के जरिए सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण, परिवार व्यवस्था, स्वदेशी भावना और नागरिक कर्तव्यों के प्रति जागरूकता जैसे ‘पंच परिवर्तन’ का संदेश दिया गया।
संगठन का बढ़ता विस्तार
संघ के संगठनात्मक विस्तार का उल्लेख करते हुए बताया गया कि पिछले वर्ष 51,740 स्थानों पर 83,129 शाखाएं संचालित थीं, जो अब बढ़कर 55,683 स्थानों पर 88,949 हो गई हैं। यानी एक वर्ष में 3,943 नए स्थान जुड़े और शाखाओं की संख्या में 5,820 की वृद्धि दर्ज की गई है।
नक्सल क्षेत्रों और मणिपुर पर भी चर्चा
संघ पदाधिकारियों ने नक्सल प्रभावित इलाकों में शांति और विकास के लिए सरकार के प्रयासों का स्वागत किया। वहीं Manipur में शांति बहाली की दिशा में हो रही प्रगति को संतोषजनक बताया गया। इसके साथ ही Bangladesh में हिंदू समाज की स्थिति पर चिंता भी व्यक्त की गई।
संघ के मुताबिक शताब्दी वर्ष के कार्यक्रम अक्टूबर 2026 तक देशभर में विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से जारी रहेंगे।
