हादसा या सिस्टम फेलियर? लखनऊ कोचिंग सेंटर अग्निकांड से 5 बड़े सबक

लखनऊ अग्निकांड ने एक बार फिर भवन सुरक्षा और फायर सेफ्टी व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि हादसे की असली वजह केवल आग नहीं, बल्कि सुरक्षा मानकों की अनदेखी है। फायर एनओसी, इमरजेंसी निकास, नियमित निरीक्षण और जवाबदेही की कमी ऐसी त्रासदियों को बार-बार जन्म दे रही है।

Lucknow Coaching Fire Accident: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अलीगंज इलाके में एक कोचिंग सेंटर में लगी भीषण आग ने एक बार फिर पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। जिस जगह पर बच्चे अपने सुनहरे भविष्य की उम्मीदें लेकर पढ़ने गए थे, उन्हें क्या पता था कि वे ये जगह कोई क्लासरूम नहीं बल्कि 'मौत का जाल' बनने वाली है। इस दर्दनाक हादसे में कम से कम 15 लोगों ने अपनी जान गंवा दी है और कई घायल लोग अस्पताल में दर्द से कराह रहे हैं। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या यह अग्निकांड सिर्फ एक हादसा था या फिर सिस्टम की लगातार अनदेखी का नतीजा?

Lucknow fire Tragedy

लखनऊ अग्निकांड की प्रारंभिक जांच में हैरतअंगेज खुलासे

प्रारंभिक जांच में कई तथ्य सामने आए हैं, जो बेहद चौंकाने वाले और शर्मनाक है। जानकारी के अनुसार, यह तीन मंजिला इमारत सरकारी रिकॉर्ड में महज एक रिहायशी भवन के तौर पर दर्ज थी। लेकिन नियमों को ताक पर रखकर इसका इस्तेमाल एक कमर्शियल बिल्डिंग के तौर पर किया जा रहा था। इमारत में कोचिंग सेंटर, गेमिंग जोन, पेट शॉप और क्लिनिक चल रहा था। शुरुआती जांच में यह भी पता चला है कि आग की शुरुआत फ्रीजर में शॉर्ट सर्किट के कारण हुई, जो एसी कंप्रेशर फटने के कारण आग तेजी से फैल गई और फ्लोर पर धुआं भर गया। इसके अलावा बायोमेट्रिक गेट के न खुलने और छत का गेट बंद होने जैसी बातें सामने आई हैं। अगर ये तथ्य सही साबित होते हैं तो यह हादसा केवल आग लगने का नहीं, बल्कि सुरक्षा व्यवस्था के पूरी तरह विफल होने का मामला बन जाता है।

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