चुनाव आयोग ने रिमोट वोटिंग मशीन (RVM) को लेकर सोमवार को दिल्ली के कांस्टीट्यूशन क्लब में राजनीतिक दलों की एक अहम सर्वदलीय बैठक बुलाई थी। बैठक में कांग्रेस,बीजेपी सहित 7 राष्ट्रीय और 43 क्षेत्रीय दल मौजूद थे। बैठक में चुनाव आयोग RVM का डेमो देना चाहता था। लेकिन बीजेपी को छोड़कर सभी विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग के प्रेजेंटेशन को देखने से मना कर दिया।
चुनाव आयोग ने रिमोट वोटिंग मशीन (RVM) को लेकर बैठक बुलाई थी
चुनाव आयोग द्वारा आज बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में कांग्रेस से दिग्विजय सिंह, बीजेपी से भूपेंद्र यादव, सपा से राम गोपाल यादव,पीडीपी सोहेल बुखारी, टीएमसी से कल्याण बनर्जी और आम आदमी पार्टी से संजय सिंह मौजूद थे। बैठक तकरीबन 4 घंटे तक चली। बैठक के बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने कहा –
अधिकांश दलों ने RVM (रिमोट वोटिंग मशीन) का विरोध किया है। लोगों ने कहा की जब माइग्रेंट लेबर का सर्वे नही है, संख्या नही है तो इसका क्या मतलब। चुनाव आयोग का Demo तो हम तब देखेंगे जब हम इस से सहमत होंगे। दिग्विजय सिंह ने ये भी कहा की बसपा सुप्रीमों मायावती के बैलेट से चुनाव कराने के मांग का वो स्वागत करते हैं। लेकिन हाल ही में दिग्विजय सिंह ने कहा था की कांग्रेस EVM से चुनाव कराने का विरोध नहीं करती है। उन्होंने आज फिर दोहराया की EVM को लेकर लोगों के मन में संदेह है।ये चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है की वो पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित करे।
बसपा सुप्रीमों में मायावती ने बैलेट से चुनाव कराने को मांग कर राजनीतिक दलों के बीच एक नई बहस छेड़ दी है। समय समय पर कई विपक्षी दलों ने EVM की विश्वशनीयता को लेकर सवाल उठाया है। आज की बैठक में RVM के मुद्दे पर बीजेपी के अलावा सभी विपक्षी दलों का विरोध ये दिखाता है की RVM को लागू करना चुनाव आयोग के लिए आसान नहीं होगा। खासतौर पर ऐसे माहौल में जब माइग्रेटेड लेबर का कोई सरकारी आंकड़ा उपलब्ध नहीं है।
आखिर में विपक्षी राजनीतिक दल जो पहले से ही EVM को शक की नजर से देख रहे हैं, उनके लिए RVM को स्वीकार करना आसान नहीं होगा। उनके कुछ सवाल है जो आज उन्होंने चुनाव आयोग के सामने रखा–
*प्रवासी मजदूरों का आंकड़ा कहां से आया
*क्या इसके लिए कोई सर्वे कराया गया
* प्रवासी मजदूरों का वोट किस राज्य में हो ये कैसे तय होगा। क्योंकि ज्यादातर खेतों में या लघु उद्योगों में काम करने वाले प्रवासी मजदूर सीजनल माइग्रेशन करते हैं।
*प्रवासी मजदूरों की तरह क्या NRI को भी इसमें क्यों नही शामिल किया जा सकता।
*मतदान केंद्रों की संख्या बढ़ाई जाय।
