West Asia Crisis: रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव (Sergey Lavrov) ने शुक्रवार को कहा कि भारत को रूस से होने वाली कच्चे तेल की आपूर्ति में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। उन्होंने इसे दोनों देशों के बीच मजबूत रणनीतिक साझेदारी का प्रतीक बताया, जो वैश्विक दबावों और पश्चिमी प्रतिबंधों के बावजूद लगातार मजबूत हो रही है।
रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव
सर्गेई लावरोव रूस के दिग्गज डिप्लोमेट माने जाते हैं। वह दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स के विदेश मंत्रियों की बैठक में शामिल होने के लिए आए थे। उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा, ''भारत को तेल आपूर्ति बढ़ने के आंकड़े सार्वजनिक रूप से उपलब्ध हैं।'' लावरोव की यह टिप्पणी ऐसे मौके पर आई, जब देश में हाल ही में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में वृद्धि हुई है।
'भारत को बढ़ी तेल की आपूर्ति'
लावरोव ने कहा, ''हमने यह डेटा वैश्विक मीडिया में जारी किया है। इससे साफ है कि भारत को तेल की आपूर्ति बढ़ी है। यह केवल हम पर नहीं, बल्कि हमारे भारतीय साझेदारों पर भी निर्भर करता है।''
सनद रहे कि पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के बावजूद भारत रियायती दरों पर रूस से तेल खरीद रहा है। भारत का कहना है कि उसकी ऊर्जा खरीद नीति पूरी तरह राष्ट्रीय हितों पर आधारित है और तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के लिए सस्ती ऊर्जा सुनिश्चित करना उसकी प्राथमिकता है।
समाचार एजेंसी एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक, रूस ने हाल के वर्षों में भारत के प्रमुख कच्चा तेल आपूर्तिकर्ताओं में अपनी स्थिति मजबूत की है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव वैश्विक तेल बाजार में बड़े भू-राजनीतिक परिवर्तनों और नए अंतरराष्ट्रीय समीकरणों को दर्शाता है।
अमेरिका पर बरसे लावरोव
इस दौरान, लावरोव ने अमेरिका को निशाना पर भी लिया। उन्होंने कहा कि अमेरिका वैश्विक ऊर्जा संसाधनों पर नियंत्रण स्थापित करना चाहता है और रूसी ऊर्जा कंपनियों जैसे लुकोइल और रोसनेफ्ट को वैश्विक सप्लाई चेन से बाहर करने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी नेतृत्व दुनिया के प्रमुख ऊर्जा आपूर्ति मार्गों को अपने नियंत्रण में लेना चाहता है।
