भारत के अलावा दुनिया में हिंदू अच्छी खासी संख्या में रहते हैं। हिंदुओं के सबसे बड़े संगठन ने दुनिया भर के हिंदुओं के एकजुट करने के लिए एक खास प्लान तैयार किया था। इसे फैमिली शाखा (Family Shakha) के नाम से जाना जाता है। अब आरएसएस की तैयारी है कि भारत में रह रहे हिंदुओं को बड़ी संख्या में एकजुट किया जाए। इसलिए फैमिली शाखा के कॉन्सेप्ट को भारत में भी लागू करने पर विचार किया जा रहा है। फैमिली शाखा को विदेशों में रह रहे हिंदुओं के लिए बनाया गया था।
आरएसएस की फैमिली शाखा
अब आरएसएस के सीनियर अधिकारियों का कहना है कि भारत में भी परिवार शाखा शुरू करने पर चर्चा चल रही है। इसके लिए सभी जगहों से रिस्पॉन्स भी ठीक ठाक मिल रहा है। हालांकि भारत में इसके लागू होने में एक या दो साल लग सकता है। विदेशों में सांस्कृतिक और भौगोलिक स्थितियों को देखते हुए संघ परिवार की अवधारणाओं के साथ आगे बढ़ रहा है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक विदेशों में हिंदुओं की आबादी काफी बिखरी हुई है। बहुत कम दिन होते है जब परिवार एक साथ होता है। ऐसे में एक सदस्य शाखाओं में जाता है तो उनको समस्या होती है क्योंकि वह अलग अलग समय बिताना नहीं चाहता है। इसलिए आरएसएस ने परिवार के सदस्यों के लिए अलग-अलग शाखा लगाना शुरू किया। एक ही परिवार में पुरुष और महिलाओं के लिए अलग-अलग कार्यक्रम होते हैं। बच्चों के लिए एक सेक्शन भी होता है। इस तरह परिवार के सभी सदस्य एक स्थान पर आ सकते हैं और अलग-अलग एक्टिविटी में शामिल हो सकते हैं। भारत में ऐसी स्थिति बनने जा रही है। जहां परिवार एकल हो गया है। यानी भारत में न्यूक्लियर फैमिली का कॉन्सेप्ट बढ़ता जा रहा है। मां-बाप दोनों कामकाजी है। अब ज्यादातर के लिए परिवार का समय कम है।
