आरएसएस के प्रस्ताव में राम मंदिर निर्माण की प्रशंसा, इसे विश्व इतिहास का ‘स्वर्णिम पृष्ठ' करार दिया

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  • Updated Mar 17, 2024, 11:44 PM IST

संघ ने कहा कि अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा इस संघर्ष में जीवन अर्पण करने वाले सभी बलिदानियों के प्रति श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए उपर्युक्त सभी के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करती है।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने कहा कि उसने रविवार को यहां संपन्न अपनी अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा में अयोध्या में नवनिर्मित राम मंदि को लेकर एक प्रस्ताव पारित किया है। संघ ने ‘श्रीराम मन्दिर से राष्ट्रीय पुनरुत्थान की ओर’ शीर्षक से प्रस्ताव पारित किया। इसमें कहा गया कि पौष शुक्ल द्वादशी, युगाब्द 5125 (22 जनवरी 2024) को श्रीराम जन्मभूमि पर श्रीरामलला के विग्रह की भव्य-दिव्य प्राणप्रतिष्ठा विश्व इतिहास का एक अलौकिक एवं स्वर्णिम पृष्ठ है।

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आरएसएस के प्रस्ताव में राम मंदिर निर्माण की प्रशंसा

प्रस्ताव में कहा गया- "हिन्दू समाज के सैकड़ों वर्षों के सतत संघर्ष एवं बलिदान, पूज्य संतों और महापुरुषों के मार्गदर्शन में चले राष्ट्रव्यापी आंदोलन तथा समाज के विभिन्न घटकों के सामूहिक संकल्प के परिणामस्वरुप संघर्ष काल के एक दीर्घ अध्याय का सुखद समाधान हुआ। इस पवित्र दिवस को जीवन में साक्षात् देखने के शुभ अवसर के पीछे शोधकर्ताओं, पुरातत्वविदों, विचारकों, विधिवेत्ताओं, संचार माध्यमों, बलिदानी कारसेवकों सहित आंदोलनरत समस्त हिन्दू समाज तथा शासन-प्रशासन का महत्त्वपूर्ण योगदान विशेष उल्लेखनीय है।"

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