RSS शताब्दी वर्ष: डॉ. मोहन भागवत ने संगठित समाज और राष्ट्रीय सुरक्षा पर दिया जोर

नागपुर में RSS के शताब्दी वर्ष के विजयादशमी समारोह में सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि समाज की संगठित एकता देश की सुरक्षा और विकास की आधारशिला है। उन्होंने स्वदेशी, आत्मनिर्भरता और सामाजिक समरसता पर जोर दिया। पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और दलाई लामा ने संघ की सेवा और राष्ट्रभक्ति की सराहना की।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने रेशमबाग मैदान में आयोजित विजयादशमी उत्सव में कहा कि सम्पूर्ण हिन्दू समाज का संगठित स्वरूप ही देश की एकता, एकात्मता, विकास और सुरक्षा की गारंटी है। उनका कहना है कि हिन्दू समाज सर्वसमावेशक है और ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ के सिद्धांत का संरक्षक है। डॉ. भागवत ने जोर दिया कि भारत को वैश्विक स्तर पर सम्मानित और योगदान देनेवाला देश बनाने में हिन्दू समाज की भूमिका महत्वपूर्ण है।

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RSS के सरसंघचालक मोहन भागवत। तस्वीर-टाइम्स नाउ नवभारत

स्वदेशी और आत्मनिर्भरता

सरसंघचालक ने कहा कि वैश्विक परिप्रेक्ष्य में परस्पर निर्भरता बढ़ी है, लेकिन यह निर्भरता हमारी मजबूरी नहीं बननी चाहिए। उन्होंने स्वदेशी और स्वावलंबन को राष्ट्र निर्माण का अपरिहार्य आधार बताया। अमेरिका द्वारा अपनाई गई आयात नीति और वैश्विक व्यापार पर इसके प्रभाव को ध्यान में रखते हुए उन्होंने आत्मनिर्भरता और स्थानीय उत्पादों के विकास पर बल दिया।

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