500 रुपये की घड़ी के लिए मौत: 29 साल तक सुप्रीम कोर्ट में चली सुनवाई, आखिर में बंद हुई फाइल

सुप्रीम कोर्ट ने 500 रुपये की घड़ी के लिए मौत के मामले का 29 साल बाद निस्तारण कर दिया है। ये मामला 1997 का था, जब एक घड़ी को लेकर हुए विवाद में एक व्यक्ति की जान चली गई थी।

500 रुपये की एक घड़ी को लेकर दो पड़ोसियों के बीच शुरू हुआ विवाद आखिरकार 29 साल बाद अपने कानूनी मुकाम पर पहुंच गया। सुप्रीम कोर्ट ने 1997 की इस घटना से जुड़े आपराधिक मामले का निस्तारण करते हुए एकमात्र जीवित दोषी की सजा घटाकर उतनी कर दी,जितनी वह पहले ही जेल में काट चुका है।

सुप्रीम कोर्ट

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न्यायमूर्ति उज्जवल भुइयां और न्यायमूर्ति अरुण पल्ली की पीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान पाया कि तीन दोषियों में से दो की अपील लंबित रहने के दौरान मृत्यु हो चुकी है,जबकि तीसरे आरोपी मथू की उम्र अब 60 वर्ष से अधिक हो चुकी है।

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