दिल्ली के रेड फोर्ट कार ब्लास्ट मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी यानी एनआईए की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। जांच एजेंसी ने दावा किया है कि इस मामले में गिरफ्तार आरोपियों ने पिछले साल अगस्त में लखनऊ जाकर अलग-अलग जगहों की रेकी की थी। इस दौरान उन्होंने विधानसभा समेत कई अहम जगहों पर आतंकी हमलों की साजिश भी रची थी।
लखनऊ को दहलाने की थी साजिश। (फोटो- AI)
25 से 30 अगस्त 2025 के बीच लखनऊ में थे आरोपी
एनआईए सूत्रों के मुताबिक, मामले के दो मुख्य आरोपी डॉ. मुजम्मिल शकील और डॉ. शाहीन सईद 25 से 30 अगस्त 2025 के बीच हरियाणा के फरीदाबाद से लखनऊ पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने विधानसभा, बापू भवन, बड़ा इमामबाड़ा, लालबाग और अमीनाबाद जैसे भीड़भाड़ वाले इलाकों की रेकी की थी।
विधानसभा समेत कई ठिकाने थे निशाने पर
सूत्रों के अनुसार, आरोपी विस्फोटकों से भरी कार के जरिए इन इलाकों को निशाना बनाने की योजना बना रहे थे। जांच में यह भी पता चला है कि मुजम्मिल ने अपने मोबाइल फोन से लखनऊ में ऐसे केमिकल दुकानों की तलाश की थी, जहां टीएटीपी यानी ट्राइएसीटोन ट्राइपेरॉक्साइड बनाने के लिए जरूरी रसायन मिल सकें।
टीएटीपी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर “मदर ऑफ सैटन” के नाम से जाना जाता है और इसी विस्फोटक का इस्तेमाल इन आरोपियों ने 10 नवंबर को हुए रेड फोर्ट कार ब्लास्ट में किया था।
लखनऊ में यहां रुके थे आरोपी
एनआईए के मुताबिक, शाहीन सईद ने मुजम्मिल के कहने पर इन दुकानों के नाम अपनी डायरी में नोट किए थे। बाद में यह सूची उसके मोबाइल फोन से बरामद हुई। जांच एजेंसी का दावा है कि दोनों आरोपी लखनऊ में शाहीन के रिश्तेदार के घर ठहरे थे।
जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपियों ने शहर के बाहरी इलाके में ऐसी जगह तलाशने की कोशिश की थी, जहां गुप्त तरीके से विस्फोटक तैयार किए जा सकें। एनआईए ने तकनीकी विश्लेषण, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और वित्तीय लेनदेन की जांच के जरिए पूरे घटनाक्रम को जोड़ने का दावा किया है।
14 मई को 7,500 पन्नों की चार्जशीट की थी दाखिल
एनआईए ने इस मामले में 14 मई को 7,500 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की थी। एजेंसी का कहना है कि अल-कायदा इन इंडियन सबकॉन्टिनेंट से जुड़े आतंकी संगठन अंसार गजवत-उल-हिंद का यह मॉड्यूल लखनऊ में गुप्त ठिकाना बनाकर सिलसिलेवार धमाकों की साजिश रच रहा था। हालांकि समय रहते मॉड्यूल का भंडाफोड़ कर दिया गया।
