अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे के कथित गबन मामले की जांच लगातार तेज होती जा रही है। इस मामले में अब अयोध्या पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। अदालत ने पुलिस को जेल में बंद पांच आरोपियों से पूछताछ करने की अनुमति दे दी है। माना जा रहा है कि इस पूछताछ से जांच एजेंसियों को धन के कथित गबन, पैसों के लेन-देन और इसमें शामिल अन्य लोगों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकती है।
राम मंदिर दान चोरी मामला।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, राम शंकर यादव, करुणेश पांडेय और मनीष यादव से रविवार से जेल परिसर के भीतर ही पूछताछ शुरू की जाएगी। पूछताछ के दौरान सभी आरोपियों के बयान औपचारिक रूप से दर्ज किए जाएंगे। जांच अधिकारी उनसे कथित तौर पर दान राशि के संग्रह, बैंक खातों में हुए लेन-देन, दस्तावेजों और अन्य संदिग्ध वित्तीय गतिविधियों के बारे में सवाल करेंगे।
सूत्रों का कहना है कि यदि पूछताछ के दौरान कोई नया सुराग या महत्वपूर्ण जानकारी सामने आती है तो पुलिस अदालत से आरोपियों की अलग-अलग पुलिस कस्टडी भी मांग सकती है। जांच एजेंसियों का मानना है कि आमने-सामने की पूछताछ से पूरे घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ने और मामले में अन्य संभावित लोगों की भूमिका का पता लगाने में मदद मिल सकती है।
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एसआईटी को मिला 15 दिन का और वक्त
इसी बीच, मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) को अपनी जांच पूरी करने के लिए 15 दिन का अतिरिक्त समय दिया गया है। अधिकारियों के मुताबिक, जांच का दायरा बढ़ाया गया है ताकि किसी भी पहलू को नजरअंदाज न किया जाए। SIT वित्तीय रिकॉर्ड, बैंक खातों, दस्तावेजों, डिजिटल साक्ष्यों और अन्य उपलब्ध सामग्री की गहन जांच कर रही है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि यदि किसी स्तर पर धन का दुरुपयोग हुआ है तो उसकी पूरी सच्चाई सामने लाई जा सके और दोषियों के खिलाफ ठोस कार्रवाई की जा सके।
चंपत राय के समर्थन में खुलकर आए अयोध्या संत मंडल
दूसरी ओर, इस पूरे विवाद के बीच अयोध्या संत मंडल ने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के समर्थन में खुलकर बयान दिया है। शुक्रवार को आयोजित प्रेस वार्ता में संतों ने कहा कि वे वर्षों से चंपत राय को जानते हैं और उनकी ईमानदारी तथा कार्यशैली पर उन्हें पूरा विश्वास है। संतों का कहना है कि मीडिया के कुछ वर्गों में लगाए जा रहे आरोपों के समर्थन में अब तक कोई ठोस साक्ष्य सामने नहीं आया है।
संत मंडल ने यह भी कहा कि चंपत राय ने स्वयं इस मामले की निष्पक्ष जांच के लिए SIT गठित करने की मांग की थी, जो उनकी पारदर्शिता और जवाबदेही की भावना को दर्शाता है। उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा मामले की जांच के लिए SIT गठित किए जाने के फैसले की सराहना करते हुए कहा कि सच्चाई सामने आनी चाहिए और यदि कोई दोषी है तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए।
संतों ने यह भी कहा कि लगातार विवाद और आरोपों के बावजूद चंपत राय ने धैर्य और संयम बनाए रखा है। उन्होंने उन्हें अपना पूरा समर्थन और आशीर्वाद देने की बात कही। साथ ही संत मंडल ने ट्रस्ट के सदस्य गोविंद देव गिरी से यह भी पूछा कि यदि उन्हें किसी प्रकार की आपत्ति थी तो उन्होंने पहले इस विषय को सार्वजनिक क्यों नहीं किया। उन्होंने इस संबंध में स्पष्टीकरण देने की मांग की।
6 जुलाई की बैठक पर सबकी नजरें
उधर, श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की महत्वपूर्ण बैठक 6 जुलाई को प्रस्तावित है। ऐसे समय में जब जांच तेजी से आगे बढ़ रही है और SIT को अतिरिक्त समय मिला है, इस बैठक पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। माना जा रहा है कि ट्रस्ट की बैठक में मौजूदा विवाद, जांच की प्रगति और आगे की रणनीति जैसे मुद्दों पर चर्चा हो सकती है। वहीं जांच एजेंसियां लगातार यह दावा कर रही हैं कि मामले के हर पहलू की निष्पक्ष जांच की जाएगी और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
