'भाजपा का हिंदुत्व नकली, बड़े लोगों पर नहीं हुई कार्रवाई', राम मंदिर चढ़ावा मामले में जानें और क्या बोले शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद

अयोध्या राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। इस बीच ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने एफआईआर और जांच प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाते हुए प्रभावशाली लोगों को बचाने का आरोप लगाया। साथ ही उन्होंने भाजपा के हिंदुत्व और राम मंदिर ट्रस्ट को लेकर भी तीखी टिप्पणी की।

Ram Mandir Donation Row: अयोध्या राम मंदिर कथित चढ़ावा चोरी का मामला दिन-प्रतिदिन गहराता जा रहा है। अब तक इस मामले में 8 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जबकि आगे की कार्रवाई जारी है। वहीं ज्योतिर्मठ के प्रमुख स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने मामले में दर्ज एफआईआर पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि इसमें सिर्फ छोटे कर्मचारियों के नाम शामिल किए गए हैं, जबकि इसके लिए जिम्मेदार बड़े लोगों को छोड़ दिया गया है। संभल में अपनी 'गौ धर्म यात्रा' के दौरान मीडिया से बातचीत करते हुए अविमुक्‍तेश्‍वरानंद ने कहा, "चंदे की चोरी के बारे में क्या कहा जाए? राम मंदिर के मामले में शुरू से ही मनमाने फैसले लिए गए। न तो शास्त्रों, न वेदों और न ही धार्मिक गुरुओं की सलाह का पालन किया गया। ट्रस्ट में राजनीतिक नेताओं द्वारा चुने गए लोगों को शामिल किया गया, जबकि संतों, ऋषियों और पुजारियों को दूर रखा गया।"

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शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती (फाइल फोटो)

"बड़े पैमाने पर चोरी तो प्रभावशाली लोग करते हैं"

अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने आगे आरोप लगाया कि "अगर सब कुछ निष्पक्ष तरीके से करना होता, तो ट्रस्ट की जिम्मेदारी चारों शंकराचार्यों, रामानंदाचार्य और अन्य धार्मिक गुरुओं को सौंपी जा सकती थी। इसके बजाय, भरोसेमंद राजनीतिक सहयोगियों को नियुक्त किया गया, जिससे शुरू से ही उनकी मंशा साफ हो गई थी।" दर्ज प्राथमिकी का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, "हमने सुना है कि प्राथमिकी उन लोगों के खिलाफ दर्ज की गई है जिन्होंने नोट गिने थे। उन्होंने तो बस नोटों को सीधा किया, गिना और उनकी गड्डियां बनाईं। हमें उस बड़ी चोरी के बारे में बताइए जो बाद में हुई। नोट गिनने वाला व्यक्ति अगर चोरी भी करे, तो ज्यादा से ज्यादा कुछ नोट ही ले सकता है। बड़े पैमाने पर चोरी तो प्रभावशाली लोग करते हैं। उनके खिलाफ कोई प्राथमिकी नहीं है।" उन्होंने कहा कि विपक्ष ने बिना किसी आधार के यह मुद्दा नहीं उठाया है। उन्होंने कहा, "अगर आरोपों में दम था, तो पहले ही दिन एफआईआर दर्ज होनी चाहिए थी, भले ही अज्ञात लोगों के खिलाफ ही क्यों न हो। जांच के बाद प्राथमिकी दर्ज होने से ही पता चलता है कि जांच करने लायक कुछ तो था। विपक्ष गड़बड़ियों को उजागर करके सिर्फ़ अपना फ़र्ज़ निभा रहा है।"

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