Ram Mandir Donation Row: अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में विशेष जांच दल (SIT) की तफ्तीश में एक बहुत बड़ा और चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। एसआईटी की प्रारंभिक जांच के बाद अब इस मामले की आंच श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के शीर्ष पदाधिकारियों तक पहुंच गई है। सूत्रों के मुताबिक, एसआईटी की रिपोर्ट में ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय (Champat Rai), सदस्य डॉ. अनिल मिश्र और गोपाल राव की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं और इन पर प्रशासनिक लापरवाही के साथ-साथ मिलीभगत के भी आरोप लग रहे हैं। पुलिस ने इस संबंध में तीनों पदाधिकारियों के बयान दर्ज कर लिए हैं और साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। हालांकि, इस मामले में अंतिम निर्णय विवेचना पूरी होने और अदालत के रुख पर ही निर्भर करेगा।
राम मंदिर चंदा चोरी की जांच बैंक अकाउंट कर पहुंची (फाइल फोटो- PTI)
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दान काउंटर, रसीद और बैंक खातों का होगा मिलान
जांच एजेंसियां अब सिर्फ दान पात्र से गायब हुई नकदी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि जांच का दायरा काफी बड़ा कर दिया गया है। अब कई और बिंदुओं पर गहनता से जांच की जा रही है। दान काउंटर पर रसीद काटकर लिए गए पैसे, लिखित रिकॉर्ड में दर्ज कुल चढ़ावा और वास्तव में बैंक में जमा की गई राशि के बीच के अंतर को खंगाला जा रहा है। ट्रस्ट के पास लिखित रूप में कितना दान आया और बैंक खातों में कितना पहुंचा, क्या इसमें कोई विसंगति है? इसकी जांच की जा रही है।
करोड़ों का दान देने वालों से सीधे संपर्क
इनपुट के अनुसार, जांच में यह बात भी सामने आई है कि बड़े चढ़ावे या तो सीधे ऑनलाइन/बैंक के जरिए आते थे या फिर डोनेशन काउंटर पर जमा होते थे। कुछ ऐसे दानदाता भी थे जिन्होंने करोड़ों रुपये का दान दिया। वे सीधे ट्रस्ट के सचिव चंपत राय से मिलकर पैसे सौंपते थे, जिसके बदले उन्हें प्रसाद देकर विदा किया जाता था। हालांकि, दावा है कि चंपत राय के सहयोगी इन दानदाताओं को ट्रस्ट की आधिकारिक रसीद देते थे, जिसके कारण सीधे सचिव को पैसा सौंपने पर दानदाताओं के मन में कभी कोई संदेह पैदा नहीं हुआ। अब इन सभी रसीदों और खातों का मिलान किया जा रहा है।
SIT को मिले कई स्तरों पर गंभीर चूक के संकेत
एसआईटी के सूत्रों के अनुसार, दान प्रबंधन की व्यवस्था में कई स्तरों पर घोर लापरवाही और कथित मिलीभगत के संकेत मिले हैं। जांच में सामने आया है कि दान पात्रों की सुरक्षा व्यवस्था बेहद लचर थी। नकदी की गिनती और उसका रिकॉर्ड संधारण नियमानुसार नहीं किया जा रहा था। एकत्रित नकदी को बैंक में जमा करने की प्रक्रिया में भी गंभीर प्रशासनिक चूक हुई।
अभी किसी को क्लीन चिट नहीं
जांच से जुड़े वरिष्ठ सूत्रों का स्पष्ट कहना है कि एसआईटी ने चंपत राय, डॉ. अनिल मिश्र या गोपाल राव में से किसी को भी अभी क्लीन चिट नहीं दी है। इन तीनों से जुड़े वित्तीय और प्रशासनिक दस्तावेजों की पड़ताल लगातार जारी है। उपलब्ध साक्ष्यों, बयानों और फॉरेंसिक इनपुट के आधार पर ही आगे की कानूनी कार्रवाई तय की जाएगी।
