West Asia Conflict: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शनिवार को पश्चिम एशिया संकट पर अनौपचारिक मंत्रियों के समूह की पहली बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, केंद्रीय संसदीय मंत्री किरेन रिजिजू, स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा, परमाणु ऊर्जा राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह सहित अन्य कई अधिकारी मौजूद रहे।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने की हाई लेवल मीटिंग
PM मोदी ने CMs संग की बात
इससे पहले, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम एशिया संकट और भारत पर उसके संभावित प्रभाव के संदर्भ में तैयारियों की समीक्षा के लिए मुख्यमंत्रियों और उप राज्यपालों के साथ एक बैठक की। यह बैठक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित हुई। इस दौरान, पीए मोदी ने सभी मुख्यमंत्रियों द्वारा दिए गए अहम सुझावों की सराहना करते हुए कहा कि ये सुझाव उभरती स्थिति का प्रभावी ढंग से प्रबंधन करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उन्होंने भावी चुनौतियों से निपटने के लिए सतर्कता, तैयारियों और समन्वित कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर दिया।
पीआईबी के मुताबिक, पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति का उल्लेख करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि भारत के पास इस तरह के वैश्विक व्यवधान से निपटने का पहले का अनुभव है। उन्होंने कोविड-19 महामारी के दौरान किए गए सामूहिक प्रयासों को याद किया, जब केंद्र और राज्यों ने 'टीम इंडिया' के रूप में मिलकर आपूर्ति शृंखलाओं, व्यापार और दैनिक जीवन पर प्रभाव को कम करने के लिए काम किया। उन्होंने इस बात को रेखांकित किया कि यही सहयोग और समन्वय की भावना वर्तमान परिस्थितियों से निपटने में भारत की सबसे बड़ी ताकत है।
पीएम मोदी ने इस बात पर जोर दिया था कि हालात लगातार बदल रहे है, जिसके लिए निरंतर निगरानी और अनुकूल रणनीतियों की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि 3 मार्च से एक अंतर-मंत्रालयी समूह सक्रिय है, जो दैनिक आधार पर स्थिति की समीक्षा कर रहा है और समय पर निर्णय ले रहा है। उन्होंने जोर दिया कि सरकार की प्राथमिकता आर्थिक और व्यापारिक स्थिरता बनाए रखना, ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना, नागरिकों के हितों की रक्षा करना और उद्योग एवं आपूर्ति शृंखलाओं को मजबूती प्रदान करना है।
