इंदौर के चर्चित राजा रघुवंशी हत्याकांड में आरोपी सोनम रघुवंशी की जमानत रद्द करने की मांग को लेकर शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। मेघालय सरकार ने हाई कोर्ट के जमानत आदेश को चुनौती देते हुए इसे गलत करार दिया, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल सोनम की जमानत रद्द करने से इनकार कर दिया।
राजा रघुवंशी मर्डर केस में पत्नी सोनम रघुवंशी को सुप्रीम कोर्ट ने बड़ी राहत दी है।
मेघालय सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी कि हाई कोर्ट का जमानत आदेश उचित नहीं था। उन्होंने ट्रायल कोर्ट के उस फैसले का भी हवाला दिया, जिसमें जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा गया था कि सोनम रघुवंशी के रिहा होने पर गवाहों को प्रभावित करने की आशंका है। सरकार ने अदालत को बताया कि इस हत्याकांड में कुल 94 गवाह हैं। ऐसे में जब तक गवाहों के बयान और मुकदमे की प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती, तब तक आरोपी को जमानत देना न्यायहित में नहीं होगा।
सोनम की ओर से क्या दलील दी गई?
सोनम रघुवंशी के वकील ने मेघालय सरकार की अपील का विरोध करते हुए कहा कि उनकी मुवक्किल को 9 जून 2025 को गिरफ्तार किया गया था, लेकिन गिरफ्तारी के आधारों की जानकारी विधिवत नहीं दी गई। उन्होंने कहा कि यह केवल टाइपोग्राफिकल गलती का मामला नहीं, बल्कि कानूनी प्रक्रिया से जुड़ा गंभीर मुद्दा है। वकील ने यह भी कहा कि सोनम जांच में पूरा सहयोग कर रही है और मामले में अब किसी तरह की रिकवरी भी बाकी नहीं है। इसलिए उसकी जमानत रद्द करने का कोई औचित्य नहीं बनता।
सुप्रीम कोर्ट में क्या हुई सुनवाई?
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों ने अपने-अपने तर्क रखे। केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने मामले को बेहद गंभीर बताते हुए कहा कि यह एक ऐसा मामला है, जिसमें एक महिला अपने पति को हनीमून के बहाने ले गई, उस पर हुए हमले में शामिल रही, उसकी हत्या की और फिर शव को पहाड़ से नीचे खाई में फेंक दिया। उन्होंने अदालत को बताया कि महिला अपने साथ तीन हमलावरों को भी लाई थी और हत्या की साजिश में उसकी सक्रिय भूमिका थी। घटना के बाद वह फरार हो गई थी, जिसके बाद उसे उत्तर प्रदेश से गिरफ्तार किया गया। मेहता ने कहा कि मजिस्ट्रेट भी इस बात से संतुष्ट थे कि गिरफ्तारी के कारण आरोपी को विधिवत बताए गए थे।
सुनवाई के दौरान जस्टिस एम.एम. सुंदरेश ने कहा कि पहली नजर में हाई कोर्ट के आदेश को लेकर अदालत को आपत्ति है। उन्होंने संकेत दिया कि सुप्रीम कोर्ट इस आदेश पर अंतरिम रोक लगाएगा और यह देखेगा कि मुकदमे की सुनवाई आगे किस तरह बढ़ती है। कोर्ट ने यह भी कहा कि गिरफ्तारी के आधार को लेकर पहले भी पूछताछ हो चुकी है और आरोपी ने अपनी पूर्व की जमानत याचिकाओं में यह मुद्दा नहीं उठाया था। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह ऐसा मामला नहीं है, जिसमें गिरफ्तारी का आधार आरोपी को नहीं बताया गया हो। हालांकि, जब सोनम के वकील ने अदालत को बताया कि वह फिलहाल जमानत पर है और शिलांग में मौजूद है, तो सुप्रीम कोर्ट ने इस स्तर पर उसकी जमानत रद्द करने से इनकार कर दिया।
