‘अगर भाषा के लिए आवाज उठाना बीमारी है, तो देश के ज्यादातर राज्य बीमार हैं'; राज ठाकरे का मोहन भागवत पर पलटवार

राज ठाकरे ने मोहन भागवत के उस बयान पर तीखा पलटवार किया जिसमें भाषा के पक्ष में आंदोलन को 'बीमारी' कहा गया था। उन्होंने कहा कि अगर ऐसा है तो देश के ज्यादातर राज्य इससे ग्रस्त हैं। उन्होंने आरएसएस पर अप्रत्यक्ष राजनीति करने का आरोप लगाया।

महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के अध्यक्ष राज ठाकरे ने भाषा विवाद को लेकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत पर तीखा हमला बोला है। ठाकरे ने कहा कि अगर अपनी भाषा और राज्य के पक्ष में प्रदर्शन करना “बीमारी” है, तो देश के अधिकांश राज्य इससे ग्रस्त हैं। सोमवार को ‘एक्स’ पर की गई पोस्ट में राज ठाकरे ने दावा किया कि सात और आठ फरवरी को आयोजित आरएसएस के शताब्दी समारोह में शामिल हुए लोग संघ प्रमुख के प्रति प्रेम के कारण नहीं, बल्कि केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के डर से पहुंचे थे।

राज ठाकरे और मोहन भागवत।

राज ठाकरे और मोहन भागवत।

राज ठाकरे ने का ये दावा

राज ठाकरे ने कहा कि तमिलनाडु, कर्नाटक जैसे दक्षिणी राज्यों में क्षेत्रीय पहचान बेहद मजबूत है, वहीं पंजाब, पश्चिम बंगाल और गुजरात में भी यही भावना दिखाई देती है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब कुछ राज्यों से बड़ी संख्या में लोग दूसरे राज्यों में जाकर स्थानीय संस्कृति और भाषा का अपमान करते हैं तथा अलग वोट बैंक बनाने की कोशिश करते हैं, तो स्वाभाविक रूप से स्थानीय लोगों में नाराजगी पैदा होती है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या संघ प्रमुख इन हालातों को भी “बीमारी” कहेंगे।

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