Rahul Gandhi will visit Jammu and Kashmir: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पहलगाम आतंकी हमले में घायल हुए लोगों का हाल जानने के लिए शुक्रवार को जम्मू-कश्मीर जाएंगे। कांग्रेस सूत्रों ने यह जानकारी दी। बता दें, दक्षिण कश्मीर के पहलगाम में मंगलवार, 22 अप्रैल को दोपहर में आतंकवादियों ने गोलीबारी की, जिसमें 26 लोग मारे गए। इनमें ज्यादातर पर्यटक थे।
पहलगाम हमले में घायलों से मिलकर उनका हाल जानेंगे राहुल गांधी।
घायलों से मिलकर उनका हाल जानेंगे राहुल गांधी
सूत्रों का कहना है कि राहुल गांधी शुक्रवार को अनंतनाग जिले के अस्पताल में घायलों से मिलकर उनका हाल जानेंगे। आतंकवादियों ने मंगलवार की दोपहर को कश्मीर के पहलगाम में पर्यटकों पर गोलीबारी की, जिसमें 26 लोगों की मौत हो गयी। इस आतंकी हमले में मारे गये लोगों में ज्यादातर पर्यटक थे।
मोदी सरकार को कांग्रेस का मिला पूरा समर्थन
राहुल गांधी ने सर्वदलीय बैठक में कहा कि उनका सरकार को पूरा समर्थन है। वहीं राज्यसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि हम सबने इस घटना की निंदा की है । कश्मीर मे शांति रखने के लिए फोर्स अच्छा प्रयास करे हमने यह बात रखी।
पहलगाम आतंकी हमले को लेकर हुई सर्वदलीय बैठक
सरकार ने बृहस्पतिवार को यहां सर्वदलीय बैठक में विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं को पहलगाम आतंकी हमले की जानकारी दी और उनके विचार सुने। बैठक शुरू होने पर पहलगाम आतंकी हमले के पीड़ितों के लिए कुछ क्षणों का मौन रखा गया। सरकार की ओर से रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृहमंत्री अमित शाह, विदेश मंत्री एस. जयशंकर और संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू मौजूद थे। राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक में राज्यसभा में सदन के नेता जेपी नड्डा, राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी भी मौजूद थे।
ऐसी घटना के बाद सर्वदलीय बैठक बुलाने की परंपरा
इससे पहले विपक्ष ने मांग की थी कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी बैठक की अध्यक्षता करें। मोदी बृहस्पतिवार को बिहार के मधुबनी के दौरे पर थे, जहां उन्होंने घोषणा की कि पहलगाम के हत्यारों और उनके समर्थकों की पहचान कर उन्हें दंडित किया जाएगा। सर्वदलीय बैठक के एक दिन पहले सरकार ने पाकिस्तान के खिलाफ कई कदमों की घोषणा की। सर्वदलीय बैठक बुलाने का निर्णय बुधवार को लिया गया था और सिंह एवं शाह ने विभिन्न दलों के नेताओं से संपर्क किया। राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित किसी अहम घटना के बाद सर्वदलीय बैठक बुलाने की परंपरा रही है, जैसा 2019 में पुलवामा आतंकी हमला या 2020 में भारत-चीन गतिरोध के दौरान देखा गया था। इससे जहां संकट के क्षणों में राष्ट्रीय एकता की तस्वीर पेश करने में मदद मिलती है, वहीं विपक्षी नेताओं को अपने विचारों से सरकार को अवगत कराने तथा सरकार को विभिन्न राजनीतिक दलों को आधिकारिक स्थिति के बारे में जानकारी देने का अवसर मिलता है।
इससे पहले भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) लिबरेशन के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने सर्वदलीय बैठक को ‘‘चुनिंदा जनसंपर्क कार्यक्रम’’ बताया और छोटे दलों को इससे दूर रखने के लिए सरकार की आलोचना की। भट्टाचार्य ने एक बयान में कहा कि जम्मू-कश्मीर में सत्तारूढ़ नेशनल कॉन्फ्रेंस और भाकपा (माले) लिबरेशन जैसे दलों को बैठक से बाहर रखना इस मुद्दे पर सरकार की गंभीरता की कमी को दर्शाता है।
