निर्वाचन आयोग के भीतर मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर चुनाव आयुक्तों के बीच मतभेदों की खबरों के बाद कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर करारा हमला बोला है। एक विशेष प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि देश में इस समय 'वोट चोरी, कानून चोरी और संस्था चोरी' का खेल चल रहा है, जिसे कांग्रेस और देश की जनता किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेगी।
चुनाव आयोग के विवाद पर राहुल गांधी का सबसे बड़ा हमला(Photo: X/RahulGandhi)
राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार पर सीधा निशाना साधते हुए उनके तुरंत इस्तीफे की मांग की। उन्होंने दावा किया कि चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था की निष्पक्षता खतरे में है। राहुल गांधी ने मीडिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि आयोग के दो चुनाव आयुक्तों-सुखबीर सिंह संधु और विवेक जोशी ने मतदाता सूची से नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया में गड़बड़ियों को लेकर 10 महीनों में कम से कम 14 बार अपनी लिखित आपत्तियां जताई थीं। उन्होंने दोनों चुनाव आयुक्तों के इस कदम की सराहना की।
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अपने संबोधन में राहुल गांधी ने पीएम नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और आरएसएस पर चुनाव चुराने की साजिश रचने का गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि भारत में 'एंटी-इनकम्बेंसी' (सत्ता विरोधी लहर) एक स्थापित सच्चाई रही है, जिसने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से लेकर हर बड़े नेता को प्रभावित किया। लेकिन हैरानी की बात है कि बीजेपी के राज में हरियाणा, महाराष्ट्र, यूपी और गुजरात जैसे राज्यों में यह सत्ता विरोधी लहर अचानक गायब हो जाती है। ऐसी स्थिति सिर्फ सद्दाम हुसैन के इराक या उत्तर कोरिया जैसे तानाशाह देशों में ही संभव है।
दूसरी ओर, निर्वाचन आयोग ने इन आरोपों और आंतरिक विवाद की खबरों को पूरी तरह खारिज किया है। चुनाव आयोग का कहना है कि किसी भी नीति या मसौदे पर चर्चा के दौरान अलग-अलग राय या सुझाव आना एक सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया है। आयोग ने स्पष्ट किया कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण (SIR) से जुड़े सभी अंतिम फैसले तीनों आयुक्तों की सहमति और वैधानिक प्रक्रियाओं के तहत ही लिए गए हैं।
