Rahul Gandhi Defamation Case: उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर की एमपी-एमएलए कोर्ट (Sultanpur Court) ने 22 अप्रैल को लोकसभा में विपक्ष के नेता और रायबरेली से सांसद राहुल गांधी से जुड़े एक मानहानि मामले में सुनवाई की। इस दौरान दोनों पक्षों के वकीलों के बीच दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 311 से जुड़े एक आवेदन पर विस्तार से बहस हुई। अदालत ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया है और अगली सुनवाई के लिए 2 मई की तारीख तय की है।
अदालट ने फैसला रखा सुरक्षित
राहुल गांधी की ओर से पेश वकील काशी प्रसाद शुक्ला ने बताया कि वादी पक्ष के अधिवक्ता संतोष कुमार पांडेय द्वारा धारा 311 के तहत दाखिल आवेदन पर बहस हुई। अदालत ने मामले को गंभीरता से सुनने के बाद निर्णय सुरक्षित रख लिया। इससे पहले 28 मार्च को हुई सुनवाई में वादी पक्ष ने अदालत से मांग की थी कि राहुल गांधी की आवाज का नमूना लिया जाए और उसकी फोरेंसिक जांच कराई जाए। इसके लिए सीआरपीसी की धारा 311 और 91 के तहत आवेदन दिया गया था। वादी पक्ष का कहना था कि राहुल गांधी की आवाज का मिलान पहले से मौजूद एक सीडी से कराया जाए और इसकी जांच फॉरेंसिक लैब में की जाए।
राहुल गांधी ने 20 फरवरी 2024 को अदालत में किया था आत्मसमर्पण
हालांकि, राहुल गांधी के वकीलों ने इस मांग का विरोध किया था। उनका कहना था कि यह प्रक्रिया उचित नहीं है और इसका कोई ठोस आधार नहीं है।
यह मामला भाजपा नेता विजय मिश्रा द्वारा अक्टूबर 2018 में दर्ज कराया गया था। आरोप है कि इस मामले में राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि से जुड़ी शिकायत की गई थी। इस केस में राहुल गांधी ने 20 फरवरी 2024 को अदालत में आत्मसमर्पण किया था। इसके बाद अदालत ने उन्हें 25-25 हजार रुपये के दो मुचलकों पर जमानत दे दी थी।
इसके बाद 26 जुलाई 2024 को राहुल गांधी अदालत में पेश हुए और अपना बयान दर्ज कराया। उन्होंने खुद को निर्दोष बताया और इस मामले को राजनीतिक साजिश करार दिया। अदालत ने इसके बाद वादी पक्ष को अपने साक्ष्य प्रस्तुत करने का निर्देश दिया, जिसके तहत कई गवाह भी पेश किए गए। इससे पहले 20 फरवरी को भी राहुल गांधी ने सीआरपीसी की धारा 313 के तहत बयान दिया था। उस दौरान अदालत ने उनसे आरोपों पर जवाब और स्पष्टीकरण मांगा था। हालांकि, उनके पक्ष से कोई अतिरिक्त सबूत या नया स्पष्टीकरण प्रस्तुत नहीं किया गया।
