Priyanka Gandhi: लोकसभा (Lok Sabha) में 'लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026’ पर चर्चा करते हुए कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने केंद्र सरकार निशाना साधा। उन्होंने छात्रों के संसद मार्च के दौरान छात्रों पर पैलेट गन और लाठी चार्ज को लेकर सवाल किया कि इसका आदेश किसने दिया था? उन्होंने कहा कि सिर्फ कांग्रेस पार्टी ही नहीं पूरा देश इसका जवाब जानना चाह रहा है। उन्होंने कहा कि ये सरकार युवाओं से डरती है।
लोकसभा में प्रियंका गांधी
प्रियंका गांधी ने क्या -क्या कहा?
इस दौरान प्रियंका गांधी ने सदन में उस पीड़ित छात्रा की मां का दर्द भी बयां किया, जो पुलिस की कार्रवाई में घायल हो गई थी। लोकसभा में कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा, "इस सरकार ने लगातार उन सभी सेक्टर को कमज़ोर किया है जिनसे रोजगार पैदा होते हैं। परीक्षा प्रणाली ही फेल हो गई है। पिछले दशक में 152 बार पेपर लीक हुए हैं। करोड़ों छात्र इससे प्रभावित हुए हैं, फिर भी किसी एक भी दोषी या पेपर लीक माफिया के किसी सदस्य को सजा नहीं दी गई है।" कांग्रेस सांसद ने कहा कि शिक्षा प्रणाली खुद विफल हो चुकी है। प्रियंका गांधी ने कहा, ’’प्रधानमंत्री को अपने सलाहकार बदल देने चाहिए। शायद वह असलियत से दूर जा चुके हैं। नयी-नयी समितियों से कुछ नहीं होगा।’’ उन्होंने प्रधानमंत्री पर कटाक्ष करते हुए कहा, ’’अगर ’जेन जेड’ का भरोसा वापस जीतना चाहते हैं तो कैमरे के ऐंगल बदलने से कुछ नहीं होगा। प्रधानमंत्री को कैमरे का नहीं, दिल का ऐंगल बदलना पड़ेगा।’’
धर्मेंद्र प्रधान के स्वागत पर सरकार को घेरा
संसद में एंटी-पेपर लीक विधेयक पर बहस: लोकसभा में बोलते हुए कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने कहा, " शिक्षा मंत्री (धर्मेंद्र प्रधान) ने शर्मनाक परिस्थितियों में इस्तीफा दे दिया, और कल मकर द्वार पर सत्ता पक्ष के मेरे सहयोगियों ने संसद में 'जिंदाबाद' के नारे लगाकर उनका स्वागत ऐसे किया जैसे कोई सुपरस्टार आ गया हो। अध्यक्ष महोदय, विडंबना देखिए: जहां पूर्व शिक्षा मंत्री को सम्मानित किया जा रहा था और ताज पहनाकर उनका स्वागत किया जा रहा था, वहीं महाराष्ट्र में एक परिवार अपनी बेटी की खुदकुशी का मातम मना रहा था, जो पेपर लीक की शिकार हुई थी। आपकी सरकार ने देश के करोड़ों छात्रों को क्या संदेश दिया है? आपको किस बात पर गर्व है? यह कैसा अहंकार है? जहां शर्म आनी चाहिए थी, वहां जश्न मनाया जा रहा है और तालियां बजाई जा रही हैं। एक तरफ गम और मातम है, तो दूसरी तरफ आप किसी को मालाएं पहना रहे हैं। कोई आप पर भरोसा कैसे कर सकता है?"
सरकार को शिक्षा बजट पर घेरा
देश के एजुकेशन सिस्टम में कई सारी खामियां भर गई हैं। कई बच्चे दबाव में आकर जान दे देते हैं तो कई डिप्रेशन में चले जाते हैं। परिवारों पर भी भारी दबाव है और उन्हें कर्ज लेना पड़ता है। उसके बावजूद बच्चों के अच्छे भविष्य की कोई गारंटी नहीं रह गई है। सरकार ने रोजगार पैदा करने वाले सेक्टर्स को कमजोर कर दिया। आज देश का एग्जाम सिस्टम फेल हो चुका है। 10 साल में 152 पेपर लीक हुए और 7.5 करोड़ छात्रों की जिंदगी से खिलवाड़ किया गया, मगर एक भी माफिया को सजा नहीं हुई। देश का एजुकेशन बजट 1.4 लाख करोड़ रुपए है, लेकिन NEET में 22 लाख स्टूडेंट के परिवारों से हर साल 1.32 लाख करोड़ रुपए वसूले जाते हैं। जहां हमारा एजुकेशन बजट 1.4 लाख करोड़ रुपए है, वहीं सरकार चंद अरबपतियों का 16 लाख करोड़ रुपए का कर्ज माफ कर देती है- जो दिखाता है कि सरकार की प्राथमिकता क्या है?
