Ram Mandir Donation Row: अयोध्या के राम मंदिर निर्माण के लिए इकट्ठा किए गए चंदे में कथित हेराफेरी का मामला अब एक बड़े राजनीतिक विवाद में तब्दील हो चुका है। महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पृथ्वीराज चव्हाण (Prithviraj Chavan Attack BJP) ने इस मुद्दे को लेकर सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र की सत्ताधारी बीजेपी पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं।
राम मंदिर चंदा विवाद पर सियासी घमासान
मुंबई में मीडिया से बात करते हुए चव्हाण ने कहा कि देश में एक ऐसी व्यवस्था बन गई है जहां भ्रष्टाचार करने वालों को राजनीतिक वरदहस्त (आशीर्वाद) प्राप्त है और चूंकि आरोपी सत्ता पक्ष से जुड़े हैं, इसलिए उन पर कोई कड़ी कार्रवाई होने की उम्मीद नहीं है।
टाइम्स नाउ नवभारत पर ये भी पढ़ें: TMC के पार्टी सिंबल और बैंक खातों पर किसका होगा हक? चुनाव आयोग ने ममता बनर्जी और ऋतब्रत गुट को भेजा नोटिस
पूरी लापरवाही के लिए प्रधानमंत्री जिम्मेदार-पृथ्वीराज चव्हाण
पृथ्वीराज चव्हाण ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के एक पुराने बयान का हवाला देते हुए तंज कसा। उन्होंने कहा कि जब राजनाथ सिंह खुद कहते हैं कि यह यूपीए की सरकार नहीं है जो कोई इस्तीफा दे देगा, तो साफ है कि इस मामले में जवाबदेही तय नहीं होने वाली।
चव्हाण ने जोर देकर कहा कि इस पूरी लापरवाही के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जिम्मेदार हैं। अगर दोषियों को ऐसी सजा नहीं मिलती जो सबको दिखाई दे, तो इसका मतलब साफ है कि ऊपर बैठे लोग भी इस मिलीभगत का हिस्सा हैं। अब देश की जनता ही इस बात का जवाब देगी।
'देश के करोड़ों सनातनियों और रामभक्तों की आस्था के साथ विश्वासघात'
दूसरी तरफ, दिल्ली में कांग्रेस संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक कड़ा पत्र लिखा है। वेणुगोपाल ने मांग की है कि इस पूरे 'चंदा चोरी' मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में एक विशेष टीम से कराई जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि भगवान राम के नाम पर आए चंदे में हेराफेरी करना सिर्फ एक वित्तीय घोटाला नहीं है, बल्कि देश के करोड़ों सनातनियों और रामभक्तों की आस्था के साथ बहुत बड़ा विश्वासघात है।
इस विवाद का कानूनी सिरा भी अब खिंचता जा रहा है। फैजाबाद बार एसोसिएशन ने अयोध्या पुलिस को एक नई शिकायत सौंपी है, जिसमें श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय, पूर्व ट्रस्टी अनिल मिश्रा और प्रशासक गोपाल राव के नामों का जिक्र है। एसोसिएशन ने नए तथ्यों के आधार पर एक नई एफआईआर (FIR) दर्ज करने की मांग की है।
आपको बता दें कि 25 जून को दर्ज हुई पहली एफआईआर के बाद चंपत राय और अनिल मिश्रा ने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपने पदों से इस्तीफा दे दिया था, जिसके बाद यूपी सरकार ने इस मामले की जांच कर रही एसआईटी (SIT) का कार्यकाल 15 दिनों के लिए बढ़ा दिया है ताकि जांच का दायरा बड़ा किया जा सके।
