केंद्रीय मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) आयुष मंत्रालय, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण राज्य मंत्री, प्रतापराव जाधव ने बुधवार को नई दिल्ली में आयोजित Times Network India Health Summit & Awards 2026 में कहा कि पारंपरिक और आधुनिक चिकित्सा में टकराव नहीं है। उन्होंने कहा, स्वास्थ्य सेवाओं से लोगों की अपेक्षाएं बदल रही हैं और ऐसे में भारत को आधुनिक चिकित्सा तथा आयुष की पारंपरिक पद्धतियों के बीच बेहतर तालमेल बनाने की जरूरत है।
प्रतापराव जाधव ने पारंपरिक और आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों में तालमेल की बात कही
केंद्रीय मंत्री प्रतापराव जाधव ने कहा कि भारत की विशिष्टता उसके लगातार विकसित होते आधुनिक चिकित्सा तंत्र और पीढ़ियों से चली आ रही पारंपरिक चिकित्सा विरासत, दोनों में है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इन दोनों व्यवस्थाओं के बीच संवाद बढ़ना चाहिए, ताकि लोगों को सही समय पर उचित स्वास्थ्य सेवा मिल सके।
हर उपचार का वैज्ञानिक मूल्यांकन जरूरी
प्रतापराव जाधव के मुताबिक, पारंपरिक और आधुनिक चिकित्सा के बीच बहस को किसी एक पद्धति को चुनने तक सीमित नहीं रखना चाहिए। स्वास्थ्य सेवा का मुख्य उद्देश्य मरीज को उसकी जरूरत के मुताबिक सही देखभाल उपलब्ध कराना होना चाहिए। हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि दोनों पद्धतियों के एकीकरण में सावधानी जरूरी है। हर उपचार को दूसरे उपचार के साथ जोड़ना उचित नहीं है और न ही सभी पारंपरिक उपचारों की प्रभावशीलता वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित मानी जा सकती है।
उन्होंने कहा कि प्रत्येक उपचार और चिकित्सकीय हस्तक्षेप का मूल्यांकन उसकी अपनी विशेषताओं और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर किया जाना चाहिए। जहां पारंपरिक चिकित्सा उपयोगी सहयोग दे सकती है, वहां उसे उचित तरीके से बढ़ावा दिया जाना चाहिए।
जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों पर भी ध्यान
मंत्री ने कहा कि भारत की स्वास्थ्य व्यवस्था के सामने चुनौती केवल संक्रामक रोगों और अचानक होने वाली बीमारियों तक सीमित नहीं है। मधुमेह, मोटापे और जीवनशैली से जुड़ी अन्य बीमारियों का बोझ भी बढ़ रहा है। तनाव, शारीरिक गतिविधियों की कमी, खानपान की बदलती आदतों और आधुनिक जीवनशैली ने इन चुनौतियों को और गंभीर बनाया है।
उन्होंने कहा, ये चुनौतियां हमें याद दिलाती हैं कि स्वास्थ्य सेवा सिर्फ तभी शुरू नहीं होनी चाहिए, जब कोई व्यक्ति बीमार पड़ जाए, बल्कि हमें इस बात पर भी विचार करना होगा कि लोग अपने स्वास्थ्य को बनाए रखने, जोखिम की समय रहते पहचान करने और मौजूदा बीमारियों का अधिक प्रभावी ढंग से प्रबंधन करने के लिए क्या कर सकते हैं? उनके अनुसार, योग जैसी पद्धतियां शारीरिक लचीलापन बढ़ाने और तनाव प्रबंधन में उपयोगी भूमिका निभा सकती हैं।
उन्होंने कहा, हमारे निर्माता तथा उद्यमी भारतीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजारों के लिए गुणवत्तापूर्ण उत्पादों और सेवाओं का विकास कर सकते हैं। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में हम इन्हीं बिंदुओं पर काम कर रहे हैं। भारत के पास पारंपरिक और एकीकृत चिकित्सा के संबंध में अंतरराष्ट्रीय चर्चाओं में सार्थक योगदान देने का अवसर भी है।
वैश्विक स्तर पर भी पारंपरिक चिकित्सा पर जोर
जाधव ने कहा कि भारत के निर्माता और उद्यमी गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं और समाधानों को विकसित कर दुनिया तक पहुंचा सकते हैं। उन्होंने विश्व स्वास्थ्य संगठन की 2025-2034 की वैश्विक पारंपरिक चिकित्सा रणनीति का उल्लेख करते हुए साक्ष्य, सुरक्षा, नियमन, अनुसंधान और समान पहुंच के महत्व को रेखांकित किया।
उन्होंने कहा कि Times Network India Health Summit & Awards 2026 जैसे मंचों की अहमियत केवल चर्चाओं तक सीमित नहीं होती, बल्कि इनके जरिए बनने वाली साझेदारियां भी स्वास्थ्य क्षेत्र में आगे का रास्ता तय कर सकती हैं।
