NEET Paper leak: कांग्रेस ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) के महानिदेशक अभिषेक सिंह द्वारा संसद की एक समिति के समक्ष की गई टिप्पणी को लेकर शुक्रवार को कहा कि मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट-यूजी में हुई "धांधली" को दबाने का प्रयास हो रहा है और इसके लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने यह दावा भी किया कि देश के लाखों युवाओं के लिए एनटीए अब "नेशनल ट्रॉमा एजेंसी" बन चुका है। एनटीए और शिक्षा मंत्रालय के अधिकारी बृहस्पतिवार को संसद की शिक्षा संबंधी स्थायी समिति के सामने पेश हुए थे।
कांग्रेस नेता जयराम रमेश।
रमेश ने पूछे सवाल
सूत्रों के अनुसार, जब समिति के कई सदस्यों ने सवाल किया कि नीट-यूजी परीक्षा का पेपर कैसे लीक हुआ, तो एनटीए के महानिदेशक अभिषेक सिंह ने उन्हें बताया कि परीक्षा का कोई पेपर उनके सिस्टम के माध्यम से लीक नहीं हुआ। रमेश ने ’एक्स’ पर पोस्ट किया, "2018 में एनटीए के गठन के बाद से मोदी सरकार और उसका तंत्र एनटीए द्वारा आयोजित परीक्षाओं में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं और धोखाधड़ी की सच्चाई को दबाने के लिए पेपर लीक माफिया के साथ मिलीभगत कर रहा है। आज हमें खबरों से पता चला है कि एनटीए महानिदेशक ने कल एक संसदीय समिति के सामने दावा किया था कि नीट-यूजी 2026 परीक्षा का पेपर लीक नहीं हुआ था।"
'अगर यह लीक नहीं है, तो फिर क्या है?'
रमेश के अनुसार, यदि यह सच है, तो यह बेहद शर्मनाक और चौंकाने वाली बेईमानी है क्योंकि यह स्पष्ट है कि एक 'गेस पेपर’, जिसमें असल परीक्षा में आए दर्जनों सवाल शामिल थे, परीक्षा की तारीख से काफी पहले छात्रों के पास था। रमेश ने सवाल किया, "अगर यह लीक नहीं है, तो फिर क्या है? मोदी सरकार अब इसे नकारने की कोशिश क्यों कर रही है?' उन्होंने कहा, "मोदी सरकार इससे पहले भी नीट-यूजी 2024 में सामने आई व्यापक अनियमितताओं को दबाने की कोशिश कर चुकी है। यदि उस समय सच्चाई स्वीकार कर कार्रवाई की गई होती, तो शायद नीट 2026 की यह त्रासदी टाली जा सकती थी।"
2024 की यूजीसी नेट परीक्षा का दिया हवाला
उनके मुताबिक, धोखाधड़ी से कथित तौर पर संबद्ध जिन केंद्रों की खबरें 2024 में सामने आई थीं, वे ही 2026 के इस घोटाले में भी सामने आए हैं, जैसे कि राजस्थान का सीकर है। रमेश ने कहा, "परेशान करने वाली घटनाओं की कड़ी में सीबीआई ने 2024 की यूजीसी नेट परीक्षा में किसी भी अनियमितता से इनकार करते हुए क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर दी, जबकि उस परीक्षा को उसी समय एनटीए द्वारा रद्द किया गया था। जब दिल्ली की एक अदालत ने सीबीआई से उसकी क्लोजर रिपोर्ट पर लिखित स्पष्टीकरण मांगा, तो सीबीआई ने और समय मांग लिया।" उनका कहना है, "अदालत ने भले ही इस देरी पर सीबीआई को फटकार लगाई हो, लेकिन उसके रवैये से नीट जांच में न्याय सुनिश्चित करने की उसकी मंशा पर कोई भरोसा नहीं पैदा होता।"
दोनों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए-रमेश
कांग्रेस नेता ने दावा किया, "देश के लाखों युवाओं के लिए एनटीए अब "नेशनल ट्रॉमा एजेंसी" बन चुका है। सीबीएसई, एनसीईआरटी और शिक्षा मंत्रालय के अन्य संस्थान, जिनमें केंद्रीय विश्वविद्यालय भी शामिल हैं, कोई बेहतर स्थिति में नहीं हैं। शिक्षा मंत्री ऐसे तंत्र की अगुवाई कर रहे हैं, जहां पेशेवर उत्कृष्टता की कोई कद्र नहीं है और वैचारिक नजदीकी को सबसे ज्यादा महत्व दिया जाता है।" रमेश ने कहा, "इस भयानक त्रासदी और उसे लगातार दबाने की कोशिशों के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान दोनों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।"
(एजेंसी इनपुट)
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