सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court of India) ने जनहित याचिका (PIL) पर कड़ी टिप्पणी की है। सुप्रीम कोर्ट ने पीआईएल के दुरुपयोग पर कड़ी टिप्पणी करते हुए मंगलवार को कहा कि अब पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन कई मामलों में ‘प्राइवेट इंटरेस्ट लिटिगेशन’, ‘पब्लिसिटी इंटरेस्ट लिटिगेशन’, ‘पैसा इंटरेस्ट लिटिगेशन’ और ‘पॉलिटिकल इंटरेस्ट लिटिगेशन’ में बदल गया है।
जनहित याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी (फाइल फोटो- PTI)
किस मामले पर पर सुप्रीम कोर्ट ने की यह टिप्पणी?
यह टिप्पणी नौ न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने उस समय की, जब वह धार्मिक स्थलों पर महिलाओं के साथ भेदभाव से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। इन मामलों में सबरीमाला मंदिर से जुड़ा मुद्दा भी शामिल है, साथ ही विभिन्न धर्मों में धार्मिक स्वतंत्रता की सीमा पर भी विचार किया जा रहा है। इस संविधान पीठ की अध्यक्षता मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत कर रहे हैं। उनके साथ न्यायमूर्ति बी वी नागरत्ना, एम एम सुंदरश, अहसानुद्दीन अमानुल्लाह, अरविंद कुमार, ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह, प्रसन्ना बी वराले, आर महादेवन और जॉयमाल्या बागची भी शामिल हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या-क्या कहा?
शीर्ष अदालत ने केरल के शबरिमला मंदिर में 10 से 50 वर्ष की महिलाओं के प्रवेश पर प्रतिबंध को चुनौती देने वाली ’इंडियन यंग लॉयर्स एसोसिएशन’ की 2006 की जनहित याचिका के उद्देश्य पर सवाल उठाया। ’इंडियन यंग लॉयर्स एसोसिएशन’ का प्रतिनिधित्व कर रहे अधिवक्ता रवि प्रकाश गुप्ता ने दलील दी कि जनहित याचिका जून 2006 में प्रकाशित चार समाचार पत्रों के लेखों पर आधारित थी। इस पर प्रधान न्यायाधीश ने टिप्पणी की कि जनहित याचिका को सीधे खारिज कर देना चाहिए था। पीठ ने कहा, ’’यह लेख जनहित याचिका दायर करने का आधार कैसे देता है? जनहित याचिकाएं दायर करवाने के लिए लेख लिखवाना आसान है।’’ न्यायमूर्ति नागरत्ना ने कहा, ’’हम उच्च न्यायालयों और उच्चतम न्यायालय में आम जनता के लिए जनहित याचिकाओं पर सुनवाई करते रहे हैं, न कि अखबारों में छपे लेखों के लिए।’’ उन्होंने कहा, ’’जनहित याचिका अब निजी हित याचिका, प्रचार हित याचिका, पैसा हित याचिका और राजनीतिक हित याचिका बन गई है। इन सभी को जनहित याचिका कहा जाता है, लेकिन हम केवल वास्तविक और प्रामाणिक जनहित याचिकाओं पर ही सुनवाई करते हैं।’’ उन्होंने यह भी बताया कि प्रधान न्यायाधीश को हर दिन सैकड़ों पत्र प्राप्त होते हैं। उन्होंने सवाल किया कि तो क्या इन सभी पत्रों को जनहित याचिकाओं में बदला जा सकता है।
