संसद में कौन बंद कर सकता है माइक, क्या है प्रोटोकॉल और क्या कहते हैं नियम?

  • Written by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Mar 16, 2023, 08:00 PM IST

राहुल गांधी सरकार पर आरोप लगाते हैं कि संसद में विपक्षी नेताओं का माइक बंद कर दिया जाता है। क्या वाकई ऐसा होता है? माइक बंद करने का अधिकार किसके पास है? जानते हैं...

Parliament Budget Session: कांग्रेस सांसद राहुल गांधी अक्सर सरकार पर यह आरोप लगाते रहते हैं कि संसद में उनके संबोधन के दौरान माइक बंद कर दिया जाता है। ऐसा उन्होंने लंदन में अपने भाषण के दौरान भी कहा, जिस पर देश में हंगामा बरपा है। सिर्फ राहुल गांधी ही नहीं, विपक्ष के कई नेता भी इस तरह के आरोप लगा चुके हैं। बुधवार को लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी ने तो लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पत्र लिखकर आरोप लगाया कि उनका माइक तीन दिनों तक बंद कर दिया गया था।

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लोकसभा में राहुल गांधी (फाइल फोटो)

ऐसे में आइए जानते हैं कि संसद में माइक चालू और बंद करने की प्रक्रिया क्या है? इसका प्रोटोकॉल क्या है और यह अधिकार किसके पास है और माइक चालू या बंद करने के नियम क्या कहते हैं....

पहले जानें संसद में माइक्रोफोन की व्यवस्था के बारे में

संसद के दोनों सदनों लोकसभा व राज्यसभा में प्रत्येक सदस्य के लिए एक निर्धारित सीट होती है। इस सीट से माइक्रोफोन जुड़े होते हैं, जिनका एक विशिष्ट नंबर होता है। इसके अलावा दोनों सदनों में एक अलग चैंबर होता है, जिसमें साउंड टेक्नीशियन बैठते हैं, ये वेकर्मचारी होते हैं, जो लोकसभा व राज्यसभा की कार्यवाही को रिकॉर्ड करते हैं।

अब इस चैंबर के बारे में जानिए

इस चैंबर में एक इलेक्ट्रॉनिक बोर्ड होता है, जिस पर सभी सदस्यों के सीट नंबर लिखे रहते हैं। यहां से माइक्रोफोन के बंद व चालू किया जा सकता है। इस चैंबर का आगे के हिस्से में सीसा लगा रहता है, जहां से साउंड टेक्नीशियन सदन की कार्यवाही को देखते हैं। इन टेक्नीशियनों द्वारा माइक्रोफोन को मैनुअली बंद व चालू किया जा सकता है।

क्या टेक्नीशियन खुद बंद कर देते हैं माइक?

ऐसा नहीं है। संसद की कार्यवाही के दौरान माइक्रोफोन को चालू व बंद करने की एक निर्धारित प्रक्रिया होती है। विशेषज्ञों व वरिष्ठ पत्रकारों ने अंग्रेजी वेबसाइट इंडिया टुडे को बताया कि यह केवल सदन के सभापति को ही अधिकार होता है कि वह माइक्रोफोन को चालू या बंद का निर्देश दे सकते हैं। हालांकि, इसके लिए भी नियम हैं, ऐसा केवल तब ही किया जाता है जब सदन के सदस्य द्वारा कार्यवाही को बाधित किया जा रहा हो, इस परिस्थिति में सभापति माइक्रोफोन को बंद करने का निर्देश दे सकते हैं।

शून्यकाल में खुद बंद हो जाता है माइक

शून्यकाल में माइक बंद होने के अलग नियम हैं। दरअसल, शून्यकाल के दौरान सदन के प्रत्येक सदस्य को बोलने के लिए तीन मिनट का समय दिया जाता है। जब यह समय समाप्त हो जाता है, तो माइक खुद बंद हो जाता है। हालांकि, संसद में बहस के दौरान सभापति की अनुमति पर माइक चालू किया जा सकता है। इसके अलावा सदन में जब किसी सदस्य के बोलने की बारी न हो तो उसका माइक बंद हो सकता है।

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